गंगा-जमुनी तहज़ीब की रौशनी में नहाई शिवबारात
मुहम्मदाबाद गोहना, मऊ। रविवार की सांझ जब आस्था के रंग में घुली, तो स्थानीय ब्लॉक के माहपुर दुर्गा-शिव मंदिर और करहां बाजार के शिव मंदिर से निकली शिवबारात ने पूरे क्षेत्र को भाईचारे की रोशनी से सराबोर कर दिया। नगपुर-महमूदपुर स्थित महामाई व काली माता मंदिर तक पहुंची यह पावन यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब की जीवंत तस्वीर बन गई।
हर वर्ष की भांति इस बार भी जाति-धर्म की सीमाएं पीछे छूट गईं और इंसानियत आगे चलती रही। बारात के सकुशल संपन्न होने तथा पिछले सोमवार वृद्ध नंदी के दाह संस्कार के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य भंडारे में सैकड़ों लोगों ने एक साथ बैठकर महाप्रसाद ग्रहण किया। वह दृश्य मानो यह कह रहा था- यहां दिल मिलते हैं, मतभेद नहीं।
आयोजनकर्ता विष्णुकांत श्रीवास्तव, सुनील राजभर एवं राहुल यादव ने बताया कि यह क्षेत्र बाबा घनश्याम साहब की तपस्थली और ‘जगाओ न बापू को नींद आ रही है’ के लिए विख्यात मरहूम शायर शमीम करहानी की धरती है। यहां हर त्योहार मिलजुल कर मनाया जाता है और कभी भी मजहबी दंगा या कर्फ्यू की स्थिति नहीं आई।
शिवबारात में करहां ग्रामप्रधान प्रतिनिधि श्यामबिहारी जायसवाल, माहपुर के पूर्व ग्राम प्रधान अमीरुल्लाह खां, पूर्व बीडीसी प्रत्याशी शफीक अहमद, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि रवि पासी, वर्तमान प्रत्याशी विक्की वर्मा, महेंद्र यादव, नसीरुद्दीन खां, महबूब अहमद, विजय सिंह गब्बर, माठू नट सहित सैकड़ों लोग कंधे से कंधा मिलाकर चलते नजर आए। उस शाम किसी की पहचान उसका धर्म नहीं, बल्कि उसकी भागीदारी थी।
दो थानों मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली और रानीपुर की सीमाओं से गुजरती इस शिवबारात में पुलिस बल का भी सराहनीय योगदान रहा। माहपुर, करहां एवं नगपुर की तीनों आयोजन समितियों ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। सच तो यह है कि- जहां इतिहास में सौहार्द की खुशबू हो, वहां शिवबारात सिर्फ एक परंपरा नहीं; बल्कि मोहब्बत की चलती-फिरती दास्तां बन जाती है।






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