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शिव मंदिर, पश्चिम पट्टी, भदीड़-मऊ

शिव मंदिर, पश्चिम पट्टी, भदीड़-मऊ

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना विकासखंड के भदीड़ गांव की पश्चिम पट्टी में स्थित प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि जिसने भी यहां पूरी श्रद्धा और सच्ची निष्ठा से भगवान शिव की आराधना की, उसे जीवन में सफलता एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। गांव के अनेक परिवारों की शैक्षिक, आर्थिक, प्रशासनिक तथा सामाजिक उन्नति को लोग भगवान भोलेनाथ की कृपा का प्रत्यक्ष प्रमाण मानते हैं।

मंदिर का इतिहास :

इस शिव मंदिर की स्थापना वर्ष 1920 में भगवान शिव के परम भक्त गृहस्थ संत स्वर्गीय गुलजार मौर्य गोसाई 'बाबू' ने कराई थी। उन्होंने मंदिर के साथ एक आकर्षक पुष्पवाटिका तथा कुएं का भी निर्माण कराया। समय के साथ मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य स्व. दुर्गावती सिंह एवं स्व. राणा सिंह ने प्रारंभ कराया। इसे वर्तमान भव्य स्वरुप प्रदान करने में स्वदेश सिंह, राजन सिंह तथा उनके परिवार का उल्लेखनीय योगदान रहा। ग्रामीणों के अनुसार भगवान शिव की उन पर विशेष कृपा थी। बताया जाता है कि एक बार भीषण अकाल के दौरान लोगों के कटाक्ष के बीच उनकी प्रार्थना के बाद क्षेत्र में अच्छी वर्षा हुई।

मंदिर की विशेषता :

इस प्राचीन शिवालय में दर्शन और पूजन-अर्चन करने वाले श्रद्धालुओं को मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक संतोष की अनुभूति होती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि भगवान शिव के आशीर्वाद से गांव के अनेक लोग देश-विदेश में उच्च प्रशासनिक पदों, इंजीनियरिंग, शिक्षा, व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त कर चुके हैं। भगवान शिव की प्रेरणा से गांव के अन्य धार्मिक स्थलों गुलरहवा बाबा, डीह बाबा, काली माता एवं सती माता मंदिर का सौंदर्यीकरण भी गांव निवासी स्वदेश सिंह के सहयोग से कराया गया। वर्तमान में देवकली देवलास क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों के जीर्णोद्धार की दिशा में भी कार्य तेज गति से चल रहा है।

●मंदिर की साफ-सफाई एवं पूजन-अर्चन का कार्य नियमित रुप से हम सभी ग्रामीण मिलकर करते हैं। जो भी श्रद्धालु पूरी आस्था और भक्ति के साथ भगवान शिव की पूजा करता है, उस पर भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहती है।

-चंद्रशेखर उर्फ मुन्ना मौर्य, पुजारी, भदीड़

●भगवान शिव की असीम कृपा सभी भक्तों पर बनी रहती है। उनके आशीर्वाद से गांव के अनेक लोग कैप्टन, इंजीनियर, शिक्षक तथा प्रशासनिक सेवाओं में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। सावन माह में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा लगता है और विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन होता है।

-पूर्व प्रधान इंद्रद्युम्न सिंह, शिवभक्त, भदीड़

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