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बुजुर्ग हमारी धरोहर, धरोहर को संभालने की जरुरत : डीएम

बुजुर्ग हमारी धरोहर, धरोहर को संभालने की जरुरत : डीएम

•जिन कंधों ने चलना सिखाया, आज वे ही अपनों से दूर क्यों-? डीएम आनंद वर्धन

•अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर वृद्धाश्रम पहुंचे आला अधिकारी

करहां (मऊ) : अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस के अवसर पर गुरुवार को दोपहर मुहम्मदाबाद गोहना कस्बा के जमीन बरामदपुर स्थित वृद्धाश्रम का आगन एक अजीब सी ख़ामोशी, उमड़ती संवेदनाओं और छलकती आखों का साक्षी बना। ज़िले के मुखिया जिलाधिकारी आनंद वर्धन जब अपनों से उपेक्षित इन बुज़ुर्गों के बीच पहुचे, तो माहौल केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा; वह भावना और मर्म का एक अटूट संगम बन गया।

वृद्धाश्रम की चौखट पर कदम रखते ही जिलाधिकारी ने सबसे पहले वहां मौजूद बुजुर्गों के आगे शीश झुकाकर उनका आशीर्वाद लिया। उनके जीवन में खुशहाली की दुआएं मांगते हुए जब उन्होंने अपने हाथों से फल, मिठाइयां, नए वस्त्र और आखों की रोशनी का सहारा बनने वाले चश्मे सौंपे, तो कई बुज़ुर्गों की पथराई आखें छलक उठीं। कहा जिन कंधों ने चलना सिखाया, आज वे ही तन्हा क्यों?"

वृद्धजनों से संवाद के दौरान ज़िलाधिकारी आनंद वर्धन का गला भर आया। अपने भावुक हृदय के उद्गार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, यह हमारे दौर की कैसी कड़वी और दुखद विडंबना है कि जिन विशाल वृक्षों की छांव में हमारा बचपन और भविष्य पनपा, आज वही धरोहर अपने ही घर से बेदखल होकर आश्रम की दीवारों में आश्रय खोजने को मजबूर है। यह केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हम पूरे समाज के लिए आत्मावलोकन का क्षण है। जिन हाथों ने हमें थामकर दुनिया में आगे बढ़ना सिखाया, जब उन्हें हमारे सहारे की सबसे ज़्यादा दरकार है, तब हम उन्हें यूं अकेला छोड़ रहे हैं।

उन्होंने भावुक लहजे में दोहराया कि बुजुर्ग हमारी संस्कृति की अनमोल धरोहर हैं और किसी भी धरोहर को सहेजकर, सजाकर और सम्मान के साथ रखा जाता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शासन-प्रशासन यहां रह रहे हर एक बुज़ुर्ग को योजनागत और व्यक्तिगत स्तर पर हर संभव स्नेह व सुविधा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस संवेदनशील मौके पर उपजिलाधिकारी अर्चना अग्निहोत्री ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज को इन बदलती सामाजिक परिस्थितियों और बिखरते रिश्तों की वजहों पर गंभीरता से विचार करना होगा। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में प्रबंधक लक्षिराम प्रसाद ने ज़िलाधिकारी का स्वागत किया। इसके बाद छोटे-छोटे बच्चों ने टूटते परिवारों, बिखरते रिश्तों और बुज़ुर्गों के दर्द पर आधारित एक ऐसा मार्मिक लघु नाटक प्रस्तुत किया, जिसने वहां मौजूद हर शख़्स का दिल निचोड़ दिया।

​कार्यक्रम के अंत में ज़िलाधिकारी ने बुज़ुर्गों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उचित देख-रेख के सख्त निर्देश दिए। इस भावुक कर देने वाले पल में जिला समाज कल्याण अधिकारी रश्मि मिश्रा, तहसीलदार सुधांशु शेखर, खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार वर्मा, संचालक पंकज कीर्तिमान, लालजी वर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौन और गंभीर होकर इस सामाजिक यथार्थ के साक्षी बने।




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