वीरान पड़े गांधी आश्रम में फिर गूंजा चरखे का स्वर, एसडीएम ने काता सूत
•गांधी जयंती पर खादी और स्वदेशी अपनाने का दिया संदेश
•गांधी आश्रम मुहम्मदाबाद गोहना की पुरानी यादें हुईं जीवंत
करहां (मऊ) : गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को मुहम्मदाबाद गोहना कस्बा स्थित प्राचीन गांधी खादी आश्रम में वर्षों बाद चरखे की आवाज सुनाई दी। कभी खादी और ग्रामोद्योग की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहे इस आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में एसडीएम अर्चना अग्निहोत्री ने चरखा चलाकर सूत काता। इससे आश्रम से जुड़ी पुरानी स्मृतियां एक बार फिर जीवंत हो उठीं। इससे पहले अधिकारियों ने महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
एसडीएम ने कहा कि गांधीजी ने चरखे को स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और श्रम के सम्मान का प्रतीक बनाया था। आधुनिक दौर में चरखे का चलन भले ही कम हुआ हो, लेकिन खादी और स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों का जुड़ाव बनाए रखना जरुरी है। उन्होंने लोगों से खादी के वस्त्रों को अपनाने तथा स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की। तहसीलदार सुधांशु शेखर, पूर्व ब्लाक प्रमुख रामप्रकाश यादव, अश्वनी राय, लेखपाल मृत्युंजय सिंह, अमीन नरसिंह सिंह व पेशकार सत्यपाल सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
गौरतलब है कि यह आश्रम कभी क्षेत्र में खादी उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र था। यहां चरखे और करघों से कपड़े तैयार होने के साथ बेड, गद्दे, अगरबत्ती और शहद सहित कई उत्पाद बनाए जाते थे। बड़ी संख्या में कर्मचारी और महिलाएं इससे जुड़ी थीं और कई परिवारों की आजीविका चलती थी। समय के साथ उत्पादन गतिविधियां बंद हो गईं और परिसर में लगी मशीनें भी लंबे समय से निष्क्रिय हैं। गांधी जयंती पर एसडीएम द्वारा चरखा चलाए जाने से आश्रम के पुनर्जीवन और खादी की पुरानी परंपरा को फिर से आगे बढ़ाने की उम्मीद जगी है।


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