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लिपटकर खुद कफन में जो वतन की सांस लिखते हैं:- देवकान्त अमर बिहारी! तेरे सन्मुख नतमस्तक यह क्षेत्र है:- अज़ीत

 


करहाँ, रानीपुर, मऊ। "स्वयं की रोशनी के पृष्ठ पर बनवास बने हुए हैं, लहू की बूँदों से अपने अमित इतिहास को ढँके हुए हैं, समर्पित श्रद्धा पुष्प धरा के उन सपूतों को, स्वर्णकार खुद कफ़न में जो वतन की पृथ्वी बने हुए हैं।"

बौद्ध के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मऊ जिलांतर्गत रानीपुर पेट्रोल पंप पर आयोजित शहीद बिहारी सिंह के सम्मान में श्रद्धांजलि समारोह में भारतीय विमान पट्टनम के राजभाषा प्रबंधक और राष्ट्रीय कवि देवकांत पांडे ने अपने विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्बोधन दिया। साथ ही "सबकी तरह नाम हैं तेरा बिन उदास परिवेश है, अमर बिहारी तेरा सन्मुख नतमस्तक यह क्षेत्र है.. उक्त छात्र के माध्यम से कार्यक्रम के मंच के सदस्य तारकेश्वर सिंह "अजीत" ने अपना भावपूर्ण स्मारक पेश किया। आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रानीपुर ब्लॉक के खंड विकास पदाधिकारी विवेक कुमार सिंह के साथ विशिष्ट अतिथि रानीपुर ब्लॉक के खंड विकास पदाधिकारी देवकांत पांडे, रानीपुर ब्लॉक के एडीओ पंचायत कृष्ण कुमार एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं समाजसेवी अजय गुप्ता ने शहीद अमर बिहारी को नमन किया।

पाकिस्तान की आतंक पोषण नीति पर अपनी पंक्तियों 'शान्ति के पुजारी हैं तो वीर व्रत धारी भी हैं, शत्रु के प्रहार पर मौन नहीं साधेंगे, देश की अखंडता और आन बान शान पर आंच यदि आएगी तो रौद्र रूप धारेंगे' के माध्यम से प्रहार किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के मंत्र दिए। उन्होंने अपनी 'ये देवियां हैं पावनी, घरों की शान हैं, ना बेटियों पर ज़ुल्मो-अत्याचार कीजिए' के माध्यम से बेटियों की स्थिति पर भी प्रकाश डाला।

स्वतंत्रता दिवस, अमृत महोत्सव, मेरी माटी मेरा देश और हर घर तिरंगा कार्यक्रम के अंतर्गत बलिदानी माटी को नमन करने दैनिक जागरण की मुहिम रानीपुर पहुँची। 1965 की भारत-पाकिस्तान लड़ाई में सीमावर्ती क्षेत्रों में गोले के कई टुकड़े लगने के कारण शहीद हुए लेफ्टिनेंट बिहारी सिंह के निज धाम पर उनका नमन किया गया एवं उनके परिजनों का सम्मान किया गया। प्राथमिक विद्यालय रानीपुर में स्थित शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण, पौधरोपण सहित तिरंगा रैली में जयघोष करते हुए बच्चे शहीद के घर पहुंचे और मुख्य विकास अधिकारी के साथ उपस्थित गणमान्य आगत अतिथियों ने शहीद को नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की एवं परिजनों का सम्मान किया।

1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान आप चार राजपूत रेजिमेंट में से अल्फा कंपनी के कमांडर थे। युद्ध के अंतर्गत पाकिस्तान के छम सेक्टर में आप कंपनी के साथ तैनात थे। दुश्मन देश की चौकी पर हमला करने के दौरान पाकिस्तान की तरफ से भारी मात्रा में आरटी सेलिंग आने पर इनके कम्पनी के काफी सैनिक घायल हो गए। जिसके अंतर्गत एक ऑफिसर सहित 12 जवान बच पाए थे। इन 12 जवानों को लेकर वीर बिहारी सिंह ने पाकिस्तान की चौकी पर हमला बोल उसपर कब्ज़ा कर लिया। पाकिस्तानी सेना पोस्ट छोड़कर भाग गई। लेकिन विपक्षी सेना के काउंटर अटैक से उन्हें गोले के कई टुकड़े लगे थे जिससे वह बुरी तरह घायल हो गए। हेलीकाप्टर से फौरन उन्हें सेना चिकित्सालय श्रीनगर लाया गया और वहाँ से बेस हॉस्पिटल दिल्ली लाया गया। वहीं इलाज के दौरान 23 सितंबर1965 को वे शहीद हो गए। जबकि शहीद की पत्नी लालिता देवी का स्वर्गवास नवम्बर 2016 में हुआ।

सोमवार प्रातः 9 बजे प्राथमिक विद्यालय रानीपुर के परिसर में स्थित शहीद बिहारी सिंह की प्रतिमा पर एडीओ पंचायत रानीपुर कृष्ण कुमार एवं स्थानीय ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मन्नू चौहान ने माल्यार्पण कर पौधरोपण किया। प्रधानाध्यापक आशुतोष कुमार सिंह, सहायक अध्यापकगण संकठा प्रसाद सिंह, अबुजर अंसारी, इंद्रजीत, नसरीन बानो, निकहत जहाँ एवं साधना दूबे आदि के नेतृत्व में बच्चों ने तिरंगा रैली निकाली जो शहीद के पेट्रोल पम्प स्थित आवास तक गयी।

यहाँ शहीद के स्वजन एवं आगत अतिथियों के साथ रानीपुर खण्ड विकास अधिकारी विवेक कुमार सिंह ने शहीद के चित्र पर दीप जलाकर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित किया। तत्पश्चात आपने विशिष्ट अतिथि भारतीय विमानपत्तनम दिल्ली में राजभाषा प्रबंधक एवं राष्ट्रीय कवि देवकान्त पाण्डेय एवं एडीओ पंचायत रानीपुर कृष्ण कुमार एवं समाजसवी अजय गुप्ता के साथ स्वजन राजपूत रेजिमेंट में तैनात रहे सेवानिवृत्त नायब सूबेदार दुर्गविजय सिंह, शेषनाथ सिंह, शीला सिंह पत्नी डॉक्टर जयनाथ सिंह, बिंदू सिंह पत्नी शेषनाथ सिंह, सेवानिवृत्त सैनिक राजभूषण सिंह और उनकी पत्नी रेनू सिंह, पुत्र उदय प्रताप सिंह का अंगवस्त्र, माल्यार्पण, तुलसी माला एवं सुन्दरकाण्ड देकर सम्मान किया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी ने कहा की अमर शहीद लेफ्टिनेंट बिहारी सिंह का परिवार देश की सेवा में कई पीढ़ियों से लेकर अबतक लगा हुआ है। शहीद के पिता स्वर्गीय बालमुकुंद सिंह भी सेना में ऑफिसर रैंक से सेवानिवृत्त हुए थे। शहीद बिहारी सिंह बचपन से कुशाग्र बुद्धि के एथलेटिक व्यक्तित्व से परिपूर्ण थे। पढ़ाई, कुशल व्यवहार सहित कबड्डी एवं बॉलीबाल के कुशल खिलाड़ी थे। इसी के बल और आप सेना में ऑफिसर पद पर नियुक्त हुए।

विशिष्ट अतिथि पद से बोलते हुए अजय गुप्ता ने कहा की अपनी मिट्टी के लाल को अपनी माटी में सम्मानित करना सौभाग्य की बात है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में शहीद के बड़े पुत्र सेवानिवृत्त नायब सूबेदार दुर्गविजय सिंह ने बताया कि पिताजी सेना से गाँव आने पर काफी लोगो से मिलते-जुलते थे। अपने तीसरे बेटे शेषनाथ सिंह के जन्म के समय वे नहीं आ पाए थे। बेटे के जन्म से काफी खुश थे और शीघ्र ही घर आकर भव्य जन्मोत्सव कराना चाहते थे। लेकिन लड़ाई शुरू होने के कारण नहीं आ पाए और शहीद हो गए। एक माह के तीसरे पुत्र और मेरे छोटे भाई शेषनाथ सिंह अपने पिता का जीवित रहते चेहरा नहीं देख पाए हैं। हर वर्ष इनका शहीदी दिवस 17 अक्टूबर को समारोह पूर्वक मनाया जाता है। इस दिन प्राथमिक विद्यालय स्थित शहीद स्मारक पर मेले और कबड्डी का विशाल आयोजन होता है। जहाँ क्षेत्र सहित दूरदराज से खिलाड़ी और दर्शक भाग लेते हैं। उन्होंने दैनिक जागरण की इस पहल का स्वागत करते हुए आभार जताया।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय की छात्राओं ने राष्ट्रीय गीत पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। इसपर प्रसन्न होकर शहीद की द्वितीय पुत्रवधू शीला सिंह ने इन्हें पुरस्कृत कर इनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीयगीत वंदेमातरम और समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता शहीद बिहारी सिंह के ज्येष्ठ पुत्र ने किया। जबकि सफल और कुशल मंच संचालन करहाँ दैनिक जागरण प्रतिनिधि तारकेश्वर सिंह 'अज़ीत' ने किया। आपने शहीद बिहारी सिंह पर गीत सुनाकर सबको भावुक कर दिया। 

सबकी आँखे नम हैं तेरे बिन उदास परिवेश है।

अमर बिहारी! तेरे सन्मुख नतमस्तक यह क्षेत्र है।।

-चौड़ी छाती हुई पिता की तुमने ऐसा काम किया,

धन्य हो गई माता वह भी जिसका तुमने दूध पिया;

तेरा नाम रहेगा जीवित जबतक दुनियां शेष है..

अमर बिहारी! तेरे सन्मुख नतमस्तक यह क्षेत्र है।।

-जिस बहना ने मातृभूमि के लिए सुहाग दिया अपना,

उस बहना के देश प्रेम का और साहस का क्या कहना;

नमन कर रहा उन माँ बहनों को अपना यह देश है..

अमर बिहारी! तेरे सन्मुख नतमस्तक यह क्षेत्र है।।

-बच्चा-बच्चा रानीपुर का मान रहा आभार है,

तुम्हें समर्पित अमर बिहारी! शब्दों का यह हार है;

तेरी गुण-गाथा गाएंगे जबतक जीवन शेष है..

अमर बिहारी! तेरे सन्मुख नतमस्तक यह क्षेत्र है।।

सबकी आँखें नम हैं तेरे बिन उदास परिवेश है।

अमर बिहारी! तेरे सन्मुख नतमस्तक यह क्षेत्र है।।

इस अवसर पर ग्राम विकास अधिकारी अमर कुमार, गोकुलपुरा प्रधान अभय मौर्या, देवकली देवलास क्षेत्र पंचायत सदस्य सुखदेव राजभर, अधिवक्ता रामयज्ञ सिंह, मुकेश सिंह, मोती राम, रामविजय चौहान, बंटी गुप्ता, उमा राम आदि लोग उपस्थित रहे।

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