करहाँ के प्रख्यात चिकित्सक डॉक्टर कुँवर अनुराग सिंह ने देवरिया की दूसरे दिन की श्रीराम कथा का किया शुभारंभ
मानस प्रवक्ता डॉक्टर सूर्यभान सिंह ने सुनाया सीता अन्वेषण का प्रसंग
करहाँ, मऊ। मुहम्मदाबाद गोहना विकास खंड अन्तर्गत देवरिया खुर्द गांव के प्राचीन शिव मंदिर पर चल रही पंचदिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन करहाँ परिक्षेत्र के प्रख्यात चिकित्सक डॉक्टर कुँवर अनुराग सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन व व्यास पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्वागत माल्यार्पण के पश्चात मानस प्रवक्ता डॉक्टर सूर्यभान सिंह ने सीता अन्वेषण की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि रामायण में कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनसे सुखी और सफल जीवन की प्रेरणा मिलती है। अगर इनकी सीख को जीवन में उतार लिया जाए तो हम कई परेशानियों से बच सकते हैं।
कथा का विस्तार करते हुए उन्होंने कहा कि सीता अन्वेषण करते समय एक बार हनुमान जी भी हताश हो गए थे क्योंकि रावण सहित सभी लंकावासियों के निज गृहों, राजकीय भवनों और लंका की गलियों, रास्तों पर सीता को खोज लेने के बाद भी वे नहीं मिली। चूँकि हनुमान ने सीता को कभी देखा भी नहीं था लेकिन वे सीता के गुणों से परिचित थे। यही जानकारी उनके काम आयी। क्योंकि उनके जैसी गुण वाली कोई स्त्री लंका में नहीं दिखी। इसके बाद उनके मन में एक विचार आया कि अगर खाली हाथ लौट जाऊंगा तो वानरों के प्राण तो संकट में पड़ेंगे ही, प्रभु श्रीराम भी सीता के वियोग में प्राण त्याग देंगे, तब लक्ष्मण और भरत भी नहीं रह सकेंगे। वे स्वयं अपने स्वामियों के बिना अयोध्या नहीं जा पाएंगे जो उनकी हार्दिक इच्छा थी। बहुत से प्राणों पर संकट छाते देख उनके मन में नव विचार आया कि वे अब माता सीता को महलों में नहीं बल्कि सुनसान स्थानों में खोजेंगे। ये विचार मन में आते ही हनुमान जी फिर से नई ऊर्जा से भर गए।
डॉक्टर सूर्यभान सिंह ने कहा कि इसके बाद हनुमान ने सारे राजकीय उद्यानों और राजमहल के आसपास सीता की खोज शुरू कर दी। अंत में सफलता मिली और हनुमान ने सीता को अशोक वाटिका में खोज लिया। इस प्रकार हनुमान के एक नव विचार ने उनकी असफलता को सफलता में बदल दिया।
प्रायः हमारे साथ भी ऐसा ही होता है। किसी भी काम की शुरुआत में थोड़ी सी असफलता हमें विचलित कर देती है। हम शुरुआती हार को ही स्थायी मानकर बैठ जाते हैं। फिर से कोशिश ना करने की आदत न सिर्फ अशांति पैदा करती है बल्कि हमारी प्रतिभा को भी खत्म करती है। इसलिए असफलताओं से हार न मानकर पुनः नवविचार और नव ऊर्जा द्वारा सफलता प्राप्त करना रामायण का यह प्रसंग सिखाता है।
दूसरे दिन की कथा की शुरुआत करहां परिक्षेत्र के प्रख्यात चिकित्सक डॉक्टर कुँवर अनुराग सिंह ने दीप प्रज्जवलन व व्यास पीठ के पूजन के साथ किया। उन्होंने कथावाचकद्वय डॉक्टर सूर्यभान सिंह व पंडित ललित नारायण गिरी का माल्यार्पण कर स्वागत किया। संचालन लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता ने किया तो आभार प्रदर्शन नागेन्द्र सिंह ने किया। इस अवसर पर धर्मनाथ सिंह, दिनेश पाण्डेय, धर्मेन्द्र सिंह, बृज बिहारी सिंह, श्रवण पाण्डेय, धनंजय सिंह, बृजेश यादव, अरविंद सिंह, संदीप बारी, प्रवीण सिंह, कमलेश पाण्डेय, विवेक सिंह, आशुतोष पाण्डेय, बृजमोहन सिंह आदि उपस्थित रहे।



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