बस हादसे में जिंदा बची प्रभावती सदमे में, आकाश ने बचाई कई लोंगो की जान
करहाँ, मऊ। मऊ के खिरिया गांव से गाजीपुर के महारे जा रही लड़की की बारात वाले बस हादसे में रानीपुर थाने की नगपुर निवासिनी 60 वर्षीय प्रभावती जिंदा बच गयी हैं। लेकिन खतरनाक मंजर का खौफ अभी भी उनकी आँखों मे साफ देखा जा सकता है। अपने मायके वालों की इस भयंकर त्रासदी में हताहत होने से वह सदमें की हालत में हैं। वहीं बस में सवार नगपुर निवासी 18 वर्षीय किशोर आकाश सरोज ने जान पर खेलकर कई लोंगो की जान बचाई। यहीं के बृजेश सरोज भी बारात में जा रहे थे। भगवान का शुक्र है कि वह बस में न होकर बाइक से थे।
दुर्घटना में रानीपुर थाना के नगपुर ग्रामनिवासी शिवबहादुर पासवान के परिवार के दो लोग भी शामिल रहे। उनकी ससुराल खिरिया निवासी नंदू पासवान के घर है। नंदू उनके साले हैं तथा शिवबहादुर नंदू के बहनोई हैं। शिवबहादुर तो बारात नहीं गए थे परंतु उनकी 60 वर्षीय पत्नी अपने मायके के उत्सव में शामिल होने बस में सवार थीं।
यहां से 18 वर्षीय आकाश सरोज पुत्र मुकेश सरोज भी बस में सवार थे लेकिन दोनों बाल-बाल बच गए। नगपुर ग्रामवासी भगवान का शुक्र अदा कर रहे हैं। प्रभावती देवी अभी भी सदमें में बेसुध हैं।
प्रत्यक्षदर्शी आकाश सरोज व बृजेश सरोज ने बताया जो जूता-चप्पल पहने बिना बॉडी और रॉड को टच किये दरवाजे से डायरेक्ट कूद गया वह बच गया। जिसने भी रॉड या किसी लोहे के इंगल का सहारा लिया वह घायल हो गया। शुरू में इसी टेक्नीक से काई लोंगो को मैंने बाहर किया और खुद बाहर कूदा। हालांकि एक बूढ़ी माता के दरवाजे से देर में उतरने से गेट बाधित हुआ और आग बढ़ जाने से लोग बस में फंस गए। हालांकि इसके बाद भी कई लोग दाहिने और पीछे के दरवाजे से भी कूदे और जान बचाई। बस के दोनों तरफ गड्ढे होने से निकलने में दिक्कत हो रही थी। इसके कारण भी कई लोग घायल हो गए। हादसा इतनी जल्दी और अचानक हुआ कि लोंगो को सम्हलने का मौका बहुत कम मिला। जिसने दिमाग पर नियंत्रण करके सूझबूझ दिखाई वह बच गया। हालांकि भयंकर चीख-पुकार के बीच दिमागी संतुलन बनाये रखना काफी कठिन था।


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