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राम वन नहीं जाते तो राम नहीं बनते : पंडित ललित नारायण

रामराज बैठे त्रैलोका, हर्षित भये गये सब शोका

राम वन नहीं जाते तो राम नहीं बनते : पंडित ललित नारायण


करहाँ (मऊ) : करहाँ परिक्षेत्र के भाँटीकला में चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह महायज्ञ के छठवें दिन प्रख्यात कथावाचक पंडित ललित नारायण गिरिजी महाराज ने प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की कथा सुनाई। कहा कि जब राम का अयोध्या सहित सम्पूर्ण त्रिलोक के राजा के रुप में राज्याभिषेक हुआ तो सबके दुख और शोक-संताप का हरण हो गया। समस्त अयोध्यावासी हर्षातिरेक से आह्लादित हो उठे।

मानस प्रवक्ता ललित नारायण गिरी ने रावण वध के बाद राम को राजगद्दी दिलाकर कथा को "हे राजा राम तेरी आरती उतारूं" के साथ भव्य आरती कर कथा को विश्राम दिया। कथा के दौरान बताया कि राम को वन भेंजकर कैकेयी ने राम को राम बनाया। यदि कैकेयी ने साहस और दूरदर्शिता का परिचय देते हुए राम को वनवास न भेंजा होता तो राम कभी भी मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं बन पाते। कहा कि राम के राम बनने में राम का वन जाना ही सबसे महत्वपूर्ण कदम रहा। इसलिए लंका से वापस आकर सबसे पहले प्रभु श्रीराम ने कैकेयी माता से ही भेंट की।

इसके पहले भाजपा संगठन चुनाव के जिला पर्यवेक्षक व बहराइच के पूर्व सांसद अक्षयवर लाल गोंड़, भाजपा जिलाध्यक्षा नूपुर अग्रवाल, जिला चुनाव अधिकारी रामतेज पांडेय, जिला महामंत्री रामाश्रय मौर्य, सह चुनाव अधिकारी छोटू प्रसाद, पूर्व जिला पंचायत सदस्य रविभूषण प्रताप सिंह व आशीष चौधरी, विजय सिंह गब्बर आदि ने पहुँचकर व्यासपीठ का पूजन किया। साथ ही कथाव्यास का स्वागत माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस दौरान भाँटीकला ग्राम प्रधान प्रतिनिधि संतोष सिंह मिंटू ने सबका अंगवस्त्रम व माल्यार्पण कर स्वागत किया।

कथा के दौरान श्यामाचरण तिवारी, मनोज सिंह, सुरेंद्र सिंह, चन्द्रकान्त तिवारी, गायक कलाकार अभय सिंह, तबला वादक शिवेश सिंह, शिवनारायण गिरी, विजयदास, संतोष सिंह मिंटू, जगदंबा दूबे, वीरेंद्र सिंह, नीरज कश्यप, विपुल सिंह, विजय कुमार, अवधेश सिंह सहित सैकड़ों स्त्री-पुरुष, बालक-वृद्ध श्रोतागण मौजूद रहे। सबने मिलकर समवेत स्वर में आरती का गान किया एवं कथा प्रसाद ग्रहण कर पुण्य के भागी बने।




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