एक साथ श्रीकृष्ण व भगवती योगमाया का हुआ अवतार : पंडित महेशचंद्र
करहाँ (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के तिवारीपुर नासिरपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन पंडित महेशचंद्र ने श्रीकृष्णावतार का वृतांत सुनाया। कहा कि एक ही साथ श्रीकृष्ण और भगवती योगमाया का मंगल अवतरण हुआ, जिनमें से भगवती योगमाया आकाशवाणी करके रथारूढ़ होकर विंध्यक्षेत्र के त्रिकोण पर्वत पर आकर विराजमान हुई।
कथा विस्तार के क्रम में आचार्य महेश ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी बुधवार की मध्यरात्रि में भगवती योगमाया के साथ भगवान श्रीकृष्ण चन्द्र का प्राकट्य हुआ। उस समय वैवस्वत मन्वंतर के अट्ठाइसवें द्वापर का आठ लाख तिरसठ हजार आठ सौ पचहत्तरवां वर्ष व्यतीत हो रहा था। जिस रात्रि को जिस क्षण वृष्णि वंश में श्रीकृष्ण जन्में ठीक उसी क्षण नन्दगोप कुल में भगवती योगमाया ने जन्म ग्रहण किया। आचार्य महेश ने बताया कि जन्माष्टमी व्रत महोत्सव केवल कृष्ण के साथ नही बल्कि योगमाया सहित श्रीकृष्ण योगमाया जन्माष्टमी व्रत महोत्सव का आयोजन तीर्थ देवालय गृह कुटुम्ब में प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को श्रद्धा व उत्साह पूर्वक करना चाहिए।
कहा कि कंस कारागार माथुर मण्डल से महात्मा वसुदेव के मस्तक पर विराजमान शेषछत्रावेष्टित बालकृष्ण रातो-रात गोकुल में माता यशोदा के पर्यंक में विराजमान हो गये और यशोदाजी की कन्या श्रीयोगमायाजी क्रूरकर्मा कंस को ललकारती हुई मथुरापुरी के आकाश से देवराज इन्द्र के रथ में बैठकर अर्चित-पूजित होती हुई विन्ध्याचल पर्वत पर आकर विन्ध्यवासिनी नाम से प्रसिद्ध हो गई। वह अब अपना दर्शन-पूजन करने वाले श्रद्धालुओं के समस्त संकट बाधाओं को चूर्ण-चूर्ण कर देती है। अपने उपासकों को धन-धान्य, शुभमति, पुत्र-पौत्रादि से सम्पन्न बना देती हैं l
इस अवसर यज्ञाचार्य विमल मिश्र, पंडित शुभम तिवारी, मुख्य यजमान विजयबहादुर तिवारी व डाक्टर अशोक तिवारी, रामनारायण तिवारी दिनेश मिश्र, राजनारायण तिवारी, राजहंस तिवारी रामप्रवेश मिश्रा, धीरेंद्र सिंह, शिवाजी सिंह, अनिल चतुर्वेदी, अवधेश विश्वकर्मा सहित सैकड़ों स्त्री-पुरुष उपस्थित रहे।

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