कथा विस्तार के क्रम में बताया गया कि शिवपुराण में शिवजी के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन है। उनके विभिन्न अवतार, ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति, शिव-पार्वती विवाह सहित उनके विभिन्न पुत्रों का वर्णन है। इस कथा के श्रवण से रोग, दोष नष्ट होते हैं और सुख, संपत्ति, धन-धान्य व संतान की प्राप्ति होती है। बताया कि इस पुराण की रचना वेदव्यास ने की है। जिसे सात संहिताओं में बांटा गया है।
ज्योतिर्लिंग की कथा में कथा प्रवक्ता ने बताया कि प्रकाश के लिंग को ज्योतिलिंग कहा जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों ओर भगवान शिव ने खुद दर्शन दिये हैं। इसकी उत्पत्ति के बारे में उन्होंने तीन तरह की कथाओं पर विस्तार से चर्चा की। कथा में मुख्य रुप से आचार्य रामप्रताप शुक्ला, हरिकेश सिंह, बसंत शुक्ला, दुर्गविजय सिंह, घरभरन पांडेय, महेंद्र सिंह, रुद्रांश कुमार, राधेश्याम पांडेय, कमलेश सिंह सहित सैकड़ों स्त्री-पुरुष श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।


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