करहाँ (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के करहाँ परिक्षेत्र के दर्जन भर गांवों में बंदरों, कुत्तों व बेसहारा पशुओं का उपद्रव बहुत अधिक बढ़ गया है। इनसे किसान, व्यापारी, दुकानदार, बुनकर, विद्यार्थी, बुजुर्ग, महिलाएं सब परेशान हैं। फूल-पत्ती, बाग-बागवानी, सब्जी-फल यहां तक की बरसीम व बाजरा तक को नहीं छोड़ रहे। बाजार से कुछ सामान लेकर जाने में झपट्टा मारकर छीन लेते हैं और लोंगो को दौड़ाकर काटकर घायल भी कर देते हैं। इनके जानलेवा हमलों से क्षेत्रवासी खौफजदा हैं। वर्तमान में लगी खरीफ की फसलें भी इनकी वजह से बर्बाद हो रही हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
बतादें कि इनकी बढ़ती संख्या की वजह से किसानों को कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। एक तो दिन-रात वह लोग सिचाई करके फसलें बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उक्त फसलों को बर्बाद करने में वे कोई कसर नहीं छोड़ रहे। फसल तो दूर करहाँ क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बाग-बागवानी भी बंदरों की वजह से प्रभावित है। बुनकरों का ताना-बाना जहां ख़तम हो गया वहीं सब्जी-भाजी के बीघों खेत परती पड़े हुये हैं। क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभाग एवं अधिकारियों से करहाँ क्षेत्र की इस सबसे बड़ी समस्या से निजात दिलाने की माँग की है।
क्या कहते हैं करहाँ क्षेत्र के नागरिक..
●हमारे करहां गांव के विभिन्न मुहल्लों में इस समय बंदरों और कुत्तों के काटने की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। अभी शुक्रवार को छत पर कपड़ा सुखाने के दौरान बंदर ने मुझ पर हमला करके गंभीर रूप से घायल कर दिया। एंटी रैबीज व एंटी सीरम को डोज लगवाया गया है। शनिवार को गांव के आनंद नामक लड़के को भी बंदर ने काटकर घायल कर दिया।
◆शमशाद अहमद, बीच महाल, करहां●पिछले 10 वर्षों में करहां परिक्षेत्र के दर्जन भर गांवों के किसान, व्यवसायी, बुनकर सभी बंदरों के उत्पात से आजिज हैं। कितना भी सचेत रहा जाय लेकिन रोज कुछ न कुछ नया नुकसान हो ही जाता है।
◆आशीष प्रताप सिंह, व्यवसायी, शमशाबाद
●हमारा गांव सब्जी की खेती व बागवानी के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन बंदरों के उपद्रव से सब्जी के बीघों खेत परती पड़े हैं। हार मानकर दूसरा व्यवसाय करने को लोग मजबूर हैं।
●मेरी मां को खतरनाक बंदर 05 बार काट चुके हैं। ग्रामप्रधान सहित अन्य गांव की दर्जन भर महिलाओं, विद्यार्थियों एवं बुजुर्गो को भी अनेक बार चोटिल कर चुके हैं। समस्या का समाधान जनहित में बेहद आवश्यक है।
●हमारे क्षेत्र गांव से बंदरों के कारण बाहर ताना-बाना करना खतम हो गया। बाजार से कोई सामान टांगकर ले जाना खतरे से खाली नहीं है। अनेक बुनकर बेरोजगार हो गये।











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