श्रीकृष्ण विवाह प्रसंग के साथ भागवत कथा की हुई पूर्णाहुति
करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के लग्गूपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा की सोमवार पूर्णाहुति हो गयी। सातवें दिन कथावाचक आचार्य अनुज मिश्रा ने महारास, कंस वध व श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया और यज्ञाचार्य पंडित विवेक पांडेय ने मुख्य यजमान धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर द्वारा विधि-विधानपूर्वक वेद मंत्रों से समिधा निवेदित कर पूर्णाहुति कराई। सायंकाल भगवतप्रेमियों ने भंडारे का महाप्रसाद ग्रहण किया।
कथा में आचार्य अनुज मिश्रा ने बताया कि जब कोई आर्तभाव से परमात्मा का वरण कर लेता है, और उन्हें पाने के लिये विह्वल मन से पुकार लगाता है, तब भगवान निश्चित ही उसको पात्र समझकर ग्रहण कर लेता है। बहुत सारे लोग कहते हैं कि श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण किया था, परंतु ऐसा नहीं है। जब रुक्मिणी ने नारद से प्रभु का गुणगान सुन उन्हें मन ही मन वरण कर लिया और शिशुपाल जैसे दानव से बचने के लिए प्रभु को आर्तभाव से पुकारा तो श्रीकृष्ण ने उन्हें सम्मान सहित द्वारिकापुरी ले जाकर ग्रहण किया और विधिवत पाणिग्रहण संस्कार सम्पन्न किया। अर्थात परमात्मा हरण नहीं बल्कि भक्त के वरण करने पर ग्रहण करता है। रुक्मिणी विवाह पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण चन्द्रजी की ग्रहण लीला है।
इस अवसर पर राणाप्रताप पांडेय, बसंत सिंह, विमलेंद्र सिंह, तारा देवी, धर्मेंद्र सिंह, चंदन पांडेय, अंकित सिंह, अमरनाथ, महेश, तेज बहादुर, भोला, तेजबहादुर सहित सैकड़ो स्त्री-पुरुष श्रद्धालुगण मौजूद रहे।

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