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हे प्रहलाद सिंह आपके सन्मुख नतमस्तक यह क्षेत्र हैं : अजीत सिंह

हे प्रहलाद सिंह आपके सन्मुख नतमस्तक यह क्षेत्र हैं : अजीत सिंह

डीसीएसके पीजी कॉलेज मऊ के पहले अध्यक्ष की श्रद्धांजलि सभा में जुटे दिग्गज

पूर्वांचल के प्रख्यात संगीत कलाकारों ने प्रस्तुत की स्वरांजलि

करहां (मऊ) : जिला स्थित धवरियासाथ गांव के प्रतिष्ठित नागरिक, जिले के प्रख्यात डीसीएसके पीजी कॉलेज के पहले अध्यक्ष, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा व सिसोदिया संघ के संरक्षक प्रहलाद सिंह के निजधाम पर उनकी त्रयोदशाह युक्त श्रद्धांजलि सभा व संगीत संध्या का आयोजन किया गया। इसमें पूर्वांचल के अनेक जनपदों से पधारे विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य अतिथिगण एवं संगीत साधकों ने अपने-अपने तरीक़े से भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किया। संचालक कुँवर अजीत सिंह ने काव्यमयी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सबकी आँखें नम हैं तेरे बिन उदास परिवेश है, हे प्रहलाद सिंह आपके सन्मुख नतमस्तक यह क्षेत्र है।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुये डीसीएसके पीजी कॉलेज के सम्मानित शिक्षक हरेराम सिंह ने कहा कि श्रंद्धाजलि सभा श्राद्ध का विषय है। उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व से प्रेरणा लेना एवं उनके बताये गए अच्छे रास्तों पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। डीसीएसके पीजी कॉलेज में उनके बाद के छात्रसंघ अध्यक्ष जगन्नाथ सिंह ने कहा कि बाबू प्रहलाद सिंह अदम्य साहस व साफगोई के प्रतीक थे। वे अत्याचार व अनाचार के विरुद्ध मजबूती से खड़े मिलते थे। उन्होंने अपने जीवन काल मे क्रांतिकारी सकारात्मक परिवर्तन लाया। वे परिवार में रहते हुए भी संत जीवन व्यतीत करते थे।

लोकदल के प्रदेश महासचिव व किसान नेता देवप्रकाश राय ने कहा कि बड़े भैया प्रहलाद सिंह बहुआयामी प्रतिभा का धनी थे। एक जूनियर के रूप में मैने उनके छात्रसंघ चुनाव का जलवा देखा था। वे किशोरावस्था से ही मेरे अनन्य सहयोगी व मार्गदर्शक रहे। उन्होंने उनके असमय जाने को अपनी निजी क्षति बताया। जिला पंचायत अध्यक्ष मनोज राय व भाजपा नेता विजयप्रताप सिंह ने उन्हें जनपद की एक बड़ी विभूति बताया। कहा कि समाज के लिए वह डंके की चोट पर तैयार रहते थे। वे एक यश लेकर आये थे और यश लेकर चले गए, उनकी भरपाई संभव नहीं है।

शिवनारायण सम्प्रदाय के महंत व संत अमरजीत साहेब तथा फलाहारी बाबा ने बाबू प्रहलाद सिंह को सच्चा संत व वानप्रस्थ का अनुयायी बताया। कहा कि वे रामनाम संकीर्तन, योग, प्राणायाम, आसन, ध्यान व क्षात्र धर्म का संवाहक बताया। इसके अलावा भीष्मदेव सिंह, उमाशंकर सिंह दाढ़ी, रामाश्रय सिंह, अमरजीत साहेब, फलाहारी बाबा, अजय सिंह, नागेंद्र सिंह, राघवेंद्र प्रताप, गोलू सिंह, राकेश सिंह, बृजबिहारी सिंह, मनोज सिंह, सौरव सिंह आदि ने नम आंखों से प्रहलाद सिंह के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।

पूर्वांचल के प्रख्यात गायक कलाकार बलवंत सिंह, अशोक द्विवेदी, पुष्कर सिंह, बृजेश पांडेय, विनोद प्रताप, ज्ञानप्रकाश पांडेय, रामअशीष बागी, बृजेश पांडेय आदि ने शुरमयी श्रद्घांजलि अर्पित की। तबला वादक कैलाश पांडेय, संतोष द्विवेदी, रुद्रांश प्रताप, मोहम्मद कादिर, आशुतोष सिंह सहित अनेक संगीत साधकों ने स्वरांजलि कार्यक्रम में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सिसोदिया संघ के अध्यक्ष आरपी सिंह, स्वागत राघवेंद्र प्रताप सिंह सिसोदिया, कुशल मंच संचालन अजीत प्रताप सिंह व आभार प्रदर्शन अभय सिंह ने किया। इस मौके पर दीनबंधु राय, कुद्दन तिवारी, चन्द्रविजय सिंह, नागेंद्र सिंह, सुजीत सिंह, हरिओम राय, पप्पू यादव, अखिलेश राजभर, आर्यन सिसोदिया सहित करीब तीन हजार अतिथिगण मौजूद रहे।



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