करहां (मऊ ; मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के शमशाबाद स्थित स्वयंभू शिव मंदिर में सोमवार को सीता हरण की कथा सुनाई गई। प्रयागराज से पधारे कथावाचक जगदीशाचार्य जी महाराज ने बताया कि किस प्रकार माता जानकी की रक्षा करने के लिए पक्षीराज ने अपनी जान गंवा दी। इससे यह शिक्षा मिलती है कि मातृशक्ति की रक्षा के लिए प्राणों की फिक्र भी नहीं करनी चाहिए।
कथा के दौरान बताया गया कि किस प्रकार रावण व कालनेमि ने साधु का वेश धारण कर गलत कार्य किया गया। जहां रावण ने साधु के वेश में माता सीता का हरण किया वहीं कालनेमि ने भी साधु का वेश धारण कर लक्ष्मण शक्ति के दौरान हनुमान जी को दिग्भ्रमित करने का कार्य कियाबताया कि आज भी कई असंत संत के वेश में टीवी आदि पर प्रवचन कर बड़ा त्यागी होने का स्वांग रचते हैं और समाज को गुमराह करने का कार्य करते हैं। ऐसे लोंगो से समाज को जागरुक रहने की जरूरत है और संत और असंत में भेद कर सत्संग का पुण्य लाभ लेने की आवश्यकता है।
इस दौरान शेषनाथ सिंह, बाबूलाल, इंद्रदेव सिंह, रामाधार, जयप्रकाश सिंह, रुदल बाँसफोर, दयाशंकर तोमर, घुरहू गुप्ता, गुड्डू कुमार, हरिवंश वैरागी, अखिलेश कुमार, शैलेश कुमार, सावित्री देवी, हीरामणि देवी, गीता देवी, सत्यम सिंह, हेमा सिंह, कालिंदी देवी, आचार्य करुणाशंकर, दुखहरन यादव समेत सैकड़ों स्त्री-पुरुष मौजूद रहे।

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