सत्संग के अपमान का प्रतिफल हानिकारक : जगदीशाचार्य
करहां (मऊ) : क्षेत्र के शमसाबाद स्थित स्वयंभू शिव मंदिर में चल रही रामकथा के आठवें दिन कथा प्रवक्ता जगदीशाचार्य जी महाराज ने रामकथा के अपमान के प्रतिफल पर प्रकाश डाला। कहा कि अनेक ऐसे प्रकरण हैं जिसमें किसी न किसी व्यक्ति ने भगवान की मंगलमयी कथा का अनादर किया और उसे हानिकारक परिणाम देखने को मिले।
जगदीशाचार्य महाराज ने कहा कि प्रभु किसी का अमंगल नहीं चाहते इसलिए मनुष्य जगत को भी सत्संग का अनादर नहीं करना चाहिए। उन्होंने श्रवण कुमार और सूर्पनखा की कथा सुनाई और कहा कि किस प्रकार सत्संग व भजन में लगे बैठे श्रवण कुमार के अंधे माता-पिता से कुछ दूरी पर उन्होंने अनजाने में श्रवण कुमार का वध करके उनके सुमिरन का निरादर कर दिया और श्राप के भागी बने।
जगदीशाचार्य महाराज ने सूर्पनखा की कथा के दौरान बताया कि उसने तो भगवान के मोहपाश में बंधकर स्वयं उन्ही से शादी करने का जबर्दस्ती दबाव बनाकर उनका साक्षात अपमान कर दिया इसकी कीमत उसको अपनी नाक-कान कटवानी पड़ी और उसके परिणामस्वरूप उसके पूरे कुल का सर्वनाश हो गया। इसलिए कभी भी भगवान, उनके भजन, कीर्तन, सुमिरन व सत्संग का अपमान नहीं करना चाहिए।
इस अवसर पर जयप्रकाश सिंह, दयाशंकर सिंह, हरिश्चन्द्र पासवान, इंद्रदेव सिंह, रूदल बांसफोर, बालेन्द्र भूषण सिंह, अतुल सिंह, अखिलेश सिंह, संतोष तोमर, आरती शर्मा, मीरा सिंह, शिवदास शर्मा, बाबूलाल सिंह, रामनारायण गुप्ता, रामदरश पासवान, हेमा सिंह, खूशबू सिंह, कालिंदी देवी, शशिकला सिंह, श्यामविजय, दुखहरन यादव, रामसिंगार शर्मा, रामलगन सरोज, शेषनाथ सिंह, शैलेश कुमार, रामविलास पासवान, अंगद खरवार, हरिनाथ यादव, आधार सरोज, महावीर गोंड़, दुखहरन यादव, प्रिंस कुमार, हीरामणि, मीरा, पिंकू, कमला देवी सहित अनेक श्रद्धालुगण मौजूद रहे।






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