पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राना खातून को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दी श्रद्धांजलि
अजय राय ने कहा- राना खातून का जीवन समाजसेवा की मिसाल
बुनकर कालोनी स्थित कांग्रेस कार्यालय में उमड़ा जनसैलाब
जिले भर के कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धांजलि
मऊ। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राना खातून के आकस्मिक निधन पर मऊ जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा बुनकर कालोनी स्थित कांग्रेस कार्यालय पर एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय स्वयं मऊ पहुंचे और उन्होंने राना खातून के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सभा को संबोधित करते हुए अजय राय भावुक हो गए और कहा, "राना खातून का पूरा जीवन समाज और जनता की सेवा के लिए समर्पित रहा। वे न सिर्फ कांग्रेस की मजबूत सिपाही थीं, बल्कि उन्होंने महिलाओं, गरीबों और वंचित वर्गों के लिए जो काम किया, वह हमेशा याद रखा जाएगा।" उन्होंने कहा कि पार्टी राना खातून के योगदान को कभी नहीं भूल सकती। आने वाले समय में उनके सपनों को साकार करना ही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कांग्रेस कार्यालय बना शोकसभा स्थल..
श्रद्धांजलि सभा में मऊ जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजमंगल यादव, पूर्व विधायकगण, ब्लॉक अध्यक्ष, महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस, एनएसयूआई व अन्य प्रकोष्ठों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कांग्रेस कार्यालय शोक में डूबा रहा, और हर कोई राना खातून से जुड़ी अपनी यादें साझा करता नजर आया।
कांग्रेस पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष इंतेखाब आलम के भाई की निधन की खबर सुनकर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय जी ने उनके निज निवास घोसी पहुंचकर पूर्व अध्यक्ष के परिजनों से मिले। राजमंगल यादव ने कहा, "राना खातून एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व थीं। उन्होंने नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया और नगर पालिका अध्यक्ष रहते हुए मऊ के विकास को नई दिशा दी।" उन्होंने कहा कि राना खातून के नेतृत्व में कांग्रेस को मऊ में नई ऊर्जा मिली थी। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया।
जनसमर्थन का मिला संकेत..
इस श्रद्धांजलि सभा में उमड़े जनसैलाब ने यह संकेत दिया कि राना खातून न सिर्फ कांग्रेस पार्टी की नेता थीं, बल्कि आमजन के दिलों में बसने वाली समाजसेविका थीं। उनके निधन से मऊ की राजनीति और सामाजिक जीवन में जो खालीपन आया है, उसकी भरपाई मुश्किल है।

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