प्राचीन शिव मंदिर, देवरिया खुर्द-मऊ
करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के देवरिया खुर्द गांव के प्रवेश द्वार पर एक प्राचीन शिव मंदिर स्थित है। इस मंदिर के महादेव मनोरथ पूर्ण करने वाले जाग्रत महादेव माने जाते हैं। गांव के मुख्य द्वार पर शिव मंदिर के अतिरिक्त अनेक मदिरों के समूह का मनोहारी दृश्य देख आप दंग रह जाएंगे।
मंदिर का इतिहास : इस मंदिर का इतिहास 302 वर्ष से अधिक का बताया जाता है। इसकी स्थापना गांव के प्रारम्भिक नागरिकों में से एक स्व. बिरजू पांडेय के द्वारा की गई है। उनके द्वारा एक ही समय काल में मंदिर, सामने का पेड़, तालाब और उसकी सीढ़ियां बनवाई गई। मंदिर का गर्भगृह और तालाब की पुरानी सीढ़ियां सुर्खी-चूना से निर्मित हैं जिससे इसकी प्राचीनता झलकती है। जबकि मंदिर का हाल 1998 में निर्मित हुआ। मंदिर में स्थापित शिवलिंग बहुत ही जाग्रत हैं।
मंदिर की विशेषता : इस क्षेत्र के देवालयों में सबसे प्राचीन शिवालय देवरिया खुर्द में ही स्थित है। यहां गांव के प्रवेश द्वार पर विभिन्न देवालयों का समूह और रमणीक जलाशय देखकर मन प्रसन्न हो जाएगा। बताया जाता है कि इधर के 42 गांवों में सबसे पहले देवरिया एवं सौसरवां गांव ही बसे थे। इसलिए यह कहा जा सकता है कि सबसे पहले बसे इस गांव का शिवालय भी प्राचीन होगा। ऐसी मान्यता है कि यहां नियमित साफ-सफाई और पूजा करने वालों के मनोरथ अवश्य सिद्ध होते हैं। मनौतियां पूर्ण होने के अनेक उदाहरण ग्रामवासियों से सुने जा सकते हैं। बगल के गांव के श्रीधर पंडित को यहां की भक्ति का प्रसाद वंशवृद्धि के रूप में प्राप्त हुआ।
•मंदिर का कोई नियुक्त पुजारी नहीं है। इसलिए पिछले 32 वर्षों से नियमित विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर रहा हूं। वैसे गांव सहित अन्य गांवो के लोग भी जलाभिषेक करने रोज आते हैं। सावन मास में तो माताओं-बहनों सहित तमाम श्रद्धालु भक्तों का तांता लगा रहता है।
-पूर्व प्रधान, राममअवध यादव, पुजारी•मैं यहां नित्य शिवार्चन के लिए आती हूं। हमारे गांव के जाग्रत महादेव मनौतियां पूर्ण करने वाले हैं। जिन्होंने यहां मन से पूजन किया उसकी मनोकामना जरूर पूरी हुई। स्वयं मैं क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान व नवनियुक्त अध्यापक रामनरेश यादव इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। इन्होंने अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर मंदिर में दो बड़े घण्टे लगवाए हैं।
-बीडीसी सदस्य, नीलम सिंह, शिवभक्त


Post a Comment