संस्कृत विद्यालय का जर्जर भवन धराशायी
•पुनर्निर्माण व घेरेबंदी कर चहारदीवारी की उठी मांग, कभी गूंजते थे संस्कृत के श्लोक, अब घूमते हैं सांप-बिच्छू
करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के चकजाफरी गांव स्थित गुरादरी मठ के पास वाला पुराना संस्कृत विद्यालय पिछले दिनों भरभरा कर धराशाई हो गया। क्षेत्रवासियों को काफी दिनों से आशंका थी कि यह जर्जर भवन कभी भी गिर सकता है। इस बाबत समाचार पत्रों में ध्वस्तीकरण की मांग करते हुए खबर भी प्रकाशित की गई थी। पिछले दिनों अचानक ही रात में यह भवन भरभरा कर धराशाई हो गया। हालांकि रात में गिरने के कारण संयोगवश कोई हताहत नहीं हुआ। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि या तो इस विद्यालय का पुनर्निर्माण कर पठन-पाठन शुरु किया जाए या इस स्थान की घेरेबंदी कराके विद्यालय की जमीन को अगल-बगल से हो रहे अतिक्रमण से बचाया जाए।
बता दें कि जहां कभी देव वाणी संस्कृत के श्लोक गुंजायमान होते थे, अब वह स्थान वीरान और खंडहर के ढेर में तब्दील हो चुका है। यहां प्रायः सामने की जमीन व बगीचे में पशु चरते हैं तथा गांव क्षेत्र के बच्चे खेला करते हैं। इस जर्जर भवन के खंडहर में सांप-बिच्छू और विषैले जीव जंतुओं का डेरा बना हुआ है। जिसके कारण बच्चों एवं जानवरों के ऊपर हमेशा खतरा मंडराया करता है।
वैराग्याश्रम मठ गुरादरी के पुजारी व विद्यालय के वर्तमान प्रबंधक रामदास का कहना है कि जर्जर भवन के कारण पिछले कुछ वर्षों से यहां पठन-पाठन बंद है। साथ ही अध्यापकों की नियुक्ति संबंधी कुछ विवादों के कारण भी व्यवस्था प्रभावित है। यदि शिक्षा विभाग धराशाई हो चुके भवन की ईंटों को चुनकर विद्यालय की जमीन को की चहारदीवारी बना दे या यहां नए विद्यालय भवन का निर्माण करा दे तो यह संस्कृत विद्यालय अपने पुराने गौरवशाली दिनों में वापस आ जाएगा।
इस संबंध में जिला विद्यालय निरिक्षक गौतम प्रसाद ने कहा कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। इसका पता और विवरण मिल जाने के बाद मैं इस समस्या के समाधान के लिए विचार करूंगा।


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