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पुत्रप्राप्ति के लिए विशेष है शमशाबाद कुटी के जलाशय की छठ पूजा

पुत्रप्राप्ति के लिए विशेष है शमशाबाद कुटी के जलाशय की छठ पूजा

करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के शमशाबाद कुटी स्थित प्राचीन जलाशय पर छठ पूजन पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए विशेष माना जाता है। बस्ती से दूर होने के बावजूद आस-पास की सैकडों व्रती महिलाएं पुत्र प्राप्ति की कामना से सूर्योपासना के महान पर्व पर छठ पूजा करने यहां आती हैं। ऐसा माना जाता है कि अपनी कृपा प्रसाद से कुटिया के सबसे विख्यात संत वीर माधव दास बाबा ने स्वयं के हाथों से इस जलाशय को सिर्फ रात में बनाया था। इस जलाशय में पूजन अर्चन करने वालों की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं।

ग्रामीणों के अनुसार यह परम पवित्र स्थान 250 से 300 साल पुराना है। यह कुटी जितनी पुरानी है, उतना ही पुराना यहां का जलाशय भी है। यहां दर्जन भर सिद्ध संतों की दिव्य समाधियां स्थित हैं। श्रद्धालु पवित्र सरोवर में डुबकी लगाकर कुटिया और उसके आसपास स्थित माता कदमा दास, धूपा दास, बच्ची दास के अतिरिक्त वनवासी संत नेऊर दास, वीरमाधव दास, तपसी दास, कमलदास, शुभकरन दास उर्फ मौनी बाबा, रामचरनदास, रामबचन दास, चरणदास आदि पवित्र समाधियों पर दर्शन पूजन कर अपने जीवन को धन्य बनाते हैं।

कुटिया से जुड़े हुए कार्यकर्ता दिनेश सरोज, कालिका प्रसाद गोंड़, हरिबंश सरोज, मनोज यादव, विशाल सरोज, पप्पू कश्यप, सुजीत कुमार, मुकेश सरोज, आकाश शर्मा आदि जलाशय के घाटों की साफ-सफाई की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने में लगे हैं, ताकि तालाब पर जुटने वाली सैकडो श्रद्धालुओं की भींड को कोई परेशानी न हो।



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