मऊ को मिली पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की दोनों सौगातें अधर में
•267.2 कि.मी. की लोकेशन पर बनना था जनसुविधा केंद्र
•277.5 कि.मी. की लोकेशन पर बनना था रैंप प्लाजा
•अपने जनपद से चढ़ने और उतरने की सुविधा नहीं हुई नसीब
करहां (मऊ) : देश की राजधानी दिल्ली, प्रदेश की राजधानी लखनऊ, बिहार और बंगाल प्रांत को पूर्वांचल से जोड़ने के लिए बहुत ही शोर शराबे के साथ अति महत्वाकांक्षी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण किया गया। मऊ जनपद के लोग भी इस खुशी में शामिल होकर हर्ष पूर्वक अपनी जमीनों को की रजिस्ट्री किए। इस आशा और विश्वास के साथ कि इस एक्सप्रेसवे से मऊ जनपद को भी उतना ही लाभ होगा, जितना इससे जुड़ने वाले अन्य जनपदों को। मऊ को इससे जन सुविधा केंद्र और रैंप प्लाजा के रूप में दो सौगातें भी मिली। लेकिन 4 सालों के बाद भी अब तक यह दोनों सौगातें आधार में लटकी हुई है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को शुरू हुए 4 साल हो गए, लेकिन अभी तक मऊ जनपद के अभागे लोग इससे होकर लखनऊ, दिल्ली या पटना जाने के लिए आजमगढ़ और गाज़ीपुर जनपद के सहारे बैठे हुए हैं। ना तो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का मऊ में कोई इंटरचेंज या रैंप प्लाजा बना और ना ही पेट्रोल पंप को छोड़कर जन सुविधा केंद्र का ही विस्तार हुआ। पूरे जनपद वासियों कि यह मांग है कि इस विषय पर सरकार गंभीरता से विचार करते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की अधूरी पड़ी मऊ जनपद की दोनों परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण कराये।
बता दें कि मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के बरडीहा गांव में 267.02 किलोमीटर की लोकेशन पर जन सुविधा केंद्र के लिए लगभग 40 बीघा जमीन अधिग्रहण की गई थी। यहां कुछ वर्षों के बाद सिर्फ फ्यूल सेंटर का निर्माण हो पाया, जबकि पूरी जमीन परती के रूप में छोड़ी गई है, जो बेसहारा गोवंशों की एक बड़ी शरण स्थली एवं चारागाह के रूप में प्रयुक्त हो रही है। अगल-बगल के किसान ना तो उसमें खेती कर पाते हैं और ना ही उसके अंदर जमा बेसहारा गोवंशों को वहां से दूर कर पाते हैं। यह गोवंश उनके आसपास के खेतों में फसलों को नष्ट करते हैं और भगाने पर इसी खाली भूमि में वापस चले जाते हैं। इससे सबसे बड़ा नुकसान आसपास के किसानों को हो रहा है। यदि यहां कार्य पूर्ण हो जाता तो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से सफर करने वालों को यहां होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, गाड़ियों के मरम्मत के स्थान, अस्पताल, ट्रामा सेंटर आदि की जन सुविधाए मिल सकती थी। लेकिन 4 वर्षों के बाद भी पेट्रोल पंप से एक अदद काम आगे नहीं बढ़ा।
इसी प्रकार रानीपुर और गोकुलपुरा के बीच 277. 5 किलोमीटर की लोकेशन पर तत्कालीन यूपीडा के मंत्री सतीश महाना के द्वारा रैंप प्लाजा बनाने की स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद यहां पर सर्वे, मैपिंग और मार्किंग हो गई। झंडिया लगाने के बाद जमीन अधिग्रहण होना था, लेकिन तब से यह परियोजना ठंढे बस्ते में चली गई। ना तो उसके बाद काम आगे बढ़ा और ना ही रैंप प्लाजा का निर्माण शुरू हो पायाम इसकी वजह से 28 किलोमीटर की सीमा में पड़ने वाले जनपद वासी और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे बसने वाले लोग पटना की तरफ जाने के लिए गाजीपुर के मरदह इंटरचेंज जाते हैं तथा लखनऊ और दिल्ली जाने के लिए आजमगढ़ जिले के सठियांव इंटरचेंज जाते हैं। कठिनाई की बात यह है कि इन दोनों स्थानों तक पहुंचने के लिए बीच में दो रेलवे लाइनों को पार करना पड़ता है। परेशानी यह है कि इस दोनों रेलवे लाइनों को पार करने के लिए सर्विस रोड पर कोई पुल नहीं बना हुआ हैम इसलिए काफी दूर घूम कर परेशानियों के साथ सठियांव और मरदह पहुंचना पड़ता है। जनहित में 267 किमी का जनसुविधा केंद्र व 277 किमी का रैंप प्लाजा या इंटरचेंज का निर्माण अति आवाश्यक है, ताकि जनपद वासियों के साथ भी न्याय हो।




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