ज्ञानमार्ग की सफलता हेतु प्रेम व समर्पण आवश्यक : डा. राकेश शास्त्री
•बजरंगनगर हलीमाबाद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का छठवां दिन
•गुरुवार को होगी विश्राम दिवस की कथा व पुर्णाहुति तथा शुक्रवार को भंडारा
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक अंतर्गत बजरंगनगर हलीमाबाद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का छठवें दिन बुधवार को कथाप्रवक्ता भागवत भूषण डाक्टर राकेश शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन, अत्याचारी कंस के संहार, गोपियों के वियोग और उद्धव-गोपी संवाद की अनूठी कथा सुनाकर श्रोताओं को भक्ति की गहराइयों से अवगत कराया। कहा कि ज्ञान मार्ग का प्रकाश तभी पूर्ण होता है जब उसके साथ प्रेम और समर्पण का दीप भी प्रज्वलित हो।
कथा के आरंभ में ब्लाक प्रमुख मुहम्मदाबाद गोहना रानू सिंह ने व्यासपीठ का पूजन कर भागवत भूषण पंडित राकेश पांडेय और हरिहर घराने से आए संगीतज्ञों का स्वागत अभिनंदन किया। कथा विस्तार में डाक्टर शास्त्री ने उन्होंने बताया कि मथुरा गमन केवल कंस-वध की दिशा में उठाया गया कदम नहीं, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना का महामंत्र और अधर्म के अंत का आरंभ था। इसके बाद उन्होंने गोपियों के विरह का वर्णन करते हुए कहा कि ब्रज की गोपियों का प्रेम लोकिक नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति निष्काम समर्पण का शाश्वत प्रतीक है। मिलन से अधिक वियोग में जो अनुभूति होती है, वही सच्चे भक्तियोग की पहचान है।
उद्धव-गोपी संवाद की चर्चा करते हुए कथाप्रवक्ता ने कहा कि एक ओर जहां उद्धव ज्ञानयोग का संदेश लेकर आते हैं, वहीं गोपियां प्रेम और भक्ति को सर्वोच्च सिद्ध करती हैं। पंडित पांडेय ने कहा कि ज्ञान मार्ग का प्रकाश तभी पूर्ण होता है जब उसके साथ प्रेम और समर्पण का दीप भी प्रज्वलित हो।
इस अवसर पर कथा श्रवण हेतु पूर्व सांसद अतुल राय, टाउन इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य हरिश्चंद्र दूबे, वर्तमान प्रधानाचार्य डाक्टर रविंद्रनाथ यादव, वरिष्ठ चिकित्सक डाक्टर शिवप्रकाश सिंह, दिनेश मिश्र बिनू, ओमकार सिंह मुन्ना, डाक्टर यू.पी. द्विवेदी, भूपेंद्र सिंह, आशुतोष पांडेय, बालगोविंद यादव, अभिमन्यु द्विवेदी, आशुतोष पांडेय, सुधीर दूबे सहित सैकड़ों महिला-पुरुष भक्तगण उपस्थित रहे। संचालन संजीव द्विवेदी ने किया।







Post a Comment