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देवताओं को भी दुर्लभ है श्रीमद्भागवत कथा- सुराणामपि दुर्लभा : गर्गाचार्य महाराज

देवताओं को भी दुर्लभ है श्रीमद्भागवत कथा- सुराणामपि दुर्लभा : गर्गाचार्य महाराज

करहां (मऊ) : जब जन्मांतर के पुण्य फल उदित होते हैं और जिस व्यक्ति पर ईश्वर व पूर्वजों का विशेष अनुग्रह होता है, सिर्फ उसे ही श्रीमद्भागवत कथा करवाने और सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से 21 पीढ़ी के अतृप्त पितरों को मोक्ष हो जाता है। यह कथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की कथा है। यह कथा देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। सुराणामपि दुर्लभा।

उक्त उद्गार काशी से पधारे श्रीमद्भागवत कथा मर्मज्ञ पंडित राकेश शुक्ल गर्गाचार्य जी महाराज ने व्यक्त किया। वे करहां गांव स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर पर आयोजित सप्तदिवसीय श्रीविष्णु महायज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन की कथा में बोल रहे थे। इसके पूर्व करहां जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशी विक्की वर्मा, मुख्य यजमान चंद्राबाला व अरुण तिवारी आदि ने व्यासपीठ का पूजन और कथाप्रवक्ता को माल्यार्पण कर कथा का शुभारंभ किया।


कथा विस्तार करते हुए गर्गाचार्य महाराज ने कहा कि शुकदेवजी महाराज मृत्युलोक में जन्में राजा परीक्षित को भागवत की कथा सुना रहे थे। उसी समय वहाँ देवता उपस्थित हो गये। देवताओं ने शुकदेवजी को प्रणाम किया और कहा कि हम अमृत कलश लेकर आये हैं। यह राजा परीक्षित को पिला दीजिये और हम सभी को कथा सुधामृत पान करा दीजिये। शुकदेव जी ने कहा- क्व सुधा क्व कथा लोके क्व काचः क्व मणिर्महान कहाँ सुधामृत काँच का टुकड़ा और कहाँ कथामृत मणि। विनिमय तो बराबर वाली वस्तु से किया जाता है। इसपर उन्होंने देवताओं को डाँटकर भगा दिया। ब्रह्माजी के पास जाकर देवताओ ने कहा कि- महाराज शुकदेवजी ने हमको कथामृत पान नही कराया। जबकि वह राजा परीक्षित को कथा सुना रहे हैं। ब्रह्माजी ने तराजू में रख कर अन्य साधनो को भागवतजी के बराबर तौलना चाहा पर स्वर्ग के सारे साधन न्यून हो गये। इस पर गर्गाचार्य महाराज ने बताया कि जो परमात्मा श्रीकृष्ण का साक्षात वाङमय स्वरूप है, उससे अन्य साधनों की समता हो ही नहीं सकती।


कथा मंच का सफल मंच संचालन चंद्रकांत तिवारी व धन्यवाद ज्ञापन आयोजक अमित तिवारी ने किया। इस अवसर पर प्रमोद मद्धेशिया, चंद्रशेखर मौर्य, पिंकी देवी, रितिक सिंह, चिंता सिंह, विजय प्रकाश वर्मा, माला पांडेय, अंजनी सिंह, चंद्रबाला देवी, श्रीकांत चौरसिया, मधुबाला देवी, राधे प्रजापति, गीता देवी, गोलू प्रजापति, बिजेंद्र सिंह सहित सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे।



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