श्रीकृष्ण लीला के दिव्य संदेश ने भक्तों को किया भाव-विभोर
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के बजरंगनगर हलीमाबाद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का छठवां दिन बुधवार को भक्ति, भाव और अध्यात्म का अद्वितीय संगम लेकर आया। कथाव्यास भागवत भूषण डॉ. राकेश शास्त्री ने श्रीकृष्ण के मथुरा गमन, कंस-वध, गोपी-वियोग और उद्धव-गोपी संवाद की रसपूर्ण कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि ज्ञानमार्ग तभी फलित होता है जब उसके साथ प्रेम, भक्ति और पूर्ण समर्पण का भाव जुड़ा हो।
कथा की शुरुआत में ब्लाक प्रमुख मुहम्मदाबाद गोहना रानू सिंह ने व्यासपीठ का विधिवत पूजन-अर्चन कर डॉ. शास्त्री तथा हरिहर घराने के आए संगीतज्ञों अम्बर, आशीष, साहिल मिश्रा व सौम्या द्विवेदी का सम्मान किया। कथाव्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण का मथुरा गमन केवल अत्याचारी कंस के विनाश तक सीमित नहीं, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म के अंत का संदेश देने वाला महत्त्वपूर्ण कदम था। इसके बाद गोपियों के विरह प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि गोपियों का प्रेम सांसारिकता से परे, निष्काम और शाश्वत भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वियोग में मिलने वाली प्रभु-चेतना ही भक्तियोग का सच्चा स्वरूप है।
उद्धव-गोपी संवाद का वर्णन करते हुए डॉ. शास्त्री ने बताया कि जहाँ उद्धव ज्ञानयोग का प्रचार करते हैं, वहीं गोपियाँ प्रेम और भक्ति को सर्वोच्च स्थान देकर सिद्ध करती हैं कि बिना प्रेम के ज्ञान अपूर्ण है। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन संजीव द्विवेदी ने किया। उन्होंने बताया कि गुरुवार को विश्राम दिवस की कथा एवं पूर्णाहुति होगी, जबकि शुक्रवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
कथा पंडाल में पूर्व सांसद अतुल राय, टाउन इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य हरिश्चंद्र दूबे, वर्तमान प्रधानाचार्य डॉ. रविंद्रनाथ यादव, मालती देवी, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शिवप्रकाश सिंह, दिनेश मिश्र बिनू, अलका, ओमकार सिंह मुन्ना, विभा, डॉ. यू.पी. द्विवेदी, भूपेंद्र सिंह, अमित कन्नौजिया, आशुतोष पांडेय, बालगोविंद यादव, अभिमन्यु द्विवेदी, सुधीर दूबे, आशुतोष पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।






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