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गोविंदाभिषेक के साथ श्रीमद्भागवत महायज्ञ की हुई पुर्णाहुति व भंडारा

गोविंदाभिषेक के साथ श्रीमद्भागवत महायज्ञ की हुई पुर्णाहुति व भंडारा

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील अंतर्गत नारायणपुरम सिगाड़ी में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सोमवार को गोविंदाभिषेक सहित हवन, पुर्णाहुति व भंडारे पूर्वक संपन्न हो गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

यज्ञाचार्य डाक्टर धनंजय पांडेय ने सहयोगी आचार्यगणों के साथ विधिवत वैदिक मंत्रध्वनियों के बीच स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती महाराज  के हाथों गोविंदाभिषेक व मुख्य यजमान पंकज युवराज व जूही सिंह के हाथों पुर्णाहुति संपन्न कराया। इस अवसर पर अपने आशीर्वचन में स्वामी ज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज ने कहा इस माह में कथा व सत्संग श्रवण विशेष फलदायी माना गया है। उन्होंने कहा कि हमारे जन्म-जन्मांतर के पुण्य उदित होने पर ही भागवत कथा और सत्संग का सौभाग्य मिलता है।

स्वामीजी ने कहा कि पूर्वजों का आशीर्वाद और मां भगवती पराम्बा की कृपा से ही ऐसे पवित्र आयोजन संपन्न होते हैं। श्रीमद्भागवत कथा 21 पीढ़ियों तक के पितरों को शांति प्रदान करने वाली मानी गई है। कथा का आयोजन करने वाले और श्रद्धा से श्रवण करने वाले दोनों ही महान पुण्य के अधिकारी बनते हैं। उन्होंने कहा कि देव और पितृ कर्मों में कभी आलस्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन्हीं से जीवन में सौभाग्य की प्राप्ति होती है। स्वामीजी ने आगे कहा कि यह कथा भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण की अनंत लीला और सनातन धर्म की पूर्णता का प्रत्यक्ष दर्शन कराती है। पूर्णमिदः पूर्णमिदम्… का उद्धरण देते हुए उन्होंने बताया कि धर्म में सब कुछ पूर्ण है और पूर्ण ही रहता है।

उन्होंने यह भी बताया कि यज्ञ का प्रारंभ वरुण पूजन से होता है और समापन नारियल की पूर्णाहुति से होता है। जो व्यक्ति अपने पितरों हेतु तर्पण और होमादि कर्म करता है, वह भगवान और पितरों दोनों का कृपापात्र बन जाता है। इस अवसर पर आचार्य भालचंद्र शुक्ल, हरिओम शरण महाराज, आशा सिंह, अभिमन्यु दूबे, रानू सिंह, आनंद त्रिपाठी, ठाकुर प्रसाद, शशांक त्रिपाठी, पप्पू सिंह, विवेक कुमार, संजीव द्विवेदी सहित सैकड़ों स्त्री-पुरुष श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।



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