एक साथ श्रीकृष्ण व भगवती योगमाया का हुआ मंगल अवतार : स्वामी ज्ञानानंद
करहां (मऊ) : आम्रपाली वैदिक शोध संस्थान बकवल में गीता जयंती महोत्सव से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ज्ञानानन्द सरस्वतीजी महाराज ने श्रीकृष्णावतार का वृतांत सुनाया। कहा कि एक साथ श्रीकृष्ण और भगवती योगमाया का मंगल अवतार हुआ, जिनमें से भगवती योगमाया आकाशवाणी करके रथारूढ़ होकर विंध्यक्षेत्र के त्रिकोण पर्वत पर आकर विराजमान हुई।
इसके पूर्व यज्ञाचार्य डाक्टर धनंजय पांडेय सहयोगी आचार्यो के साथ मिलकर ने मुख्य यजमान उर्मिला सिंह के द्वारा पूर्वाह्न सत्र में यज्ञ कर्म संपादित कराया। इसके अंतर्गत वेदी पूजन, परायण व महाआरती की गई। अपराह्न सत्र में व्यासपीठ के पूजन व स्वामीजी के स्वागत उपरांत श्रोताओं ने कथा का रसपान किया। स्वामीजी ने कथाविस्तार के क्रम में बताया कि भाद्र कृष्ण अष्टमी बुधवार की मध्यरात्रि में भगवती योगमाया के साथ भगवान श्रीकृष्णचंद्र का प्राकट्य हुआ। उस समय वैवस्वत मन्वंतर के अट्ठाइसवें द्वापर का आठ लाख तिरसठ हजार आठ सौ पचहत्तरवां वर्ष व्यतीत हो रहा था। जिस रात्रि को जिस क्षण वृष्णि वंश में श्रीकृष्ण जन्में ठीक उसी क्षण नन्दगोप कुल में भगवती योगमाया ने जन्म ग्रहण किया। स्वामीजी ने बताया कि जन्माष्टमी व्रत महोत्सव केवल कृष्ण के साथ नही, बल्कि योगमाया सहित श्रीकृष्ण योगमाया जन्माष्टमी व्रत महोत्सव का आयोजन तीर्थ-देवालय, गृह-कुटुम्ब में प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को श्रद्धा व उत्साह पूर्वक करना चाहिए।
कहा कि कंस कारागार माथुर मंडल से महात्मा वसुदेव के मस्तक पर विराजमान शेषछत्रावेष्टित बालकृष्ण रातो-रात गोकुल में माता यशोदा के पर्यंक में विराजमान हो गये और यशोदाजी की कन्या श्रीयोगमाया जी क्रूरकर्मा कंस को ललकारती हुई मथुरापुरी के आकाश से देवराज इंद्र के रथ में बैठकर अर्चित-पूजित होती हुई विंध्याचल पर्वत पर आकर विन्ध्यवासिनी नाम से प्रसिद्ध हो गई। वह अब अपना दर्शन-पूजन करने वाले श्रद्धालुओं के समस्त संकट बाधाओं को चूर्ण-चूर्ण कर देती है। अपने उपासकों को धन-धान्य, शुभमति, पुत्र-पौत्रादि से सम्पन्न बना देती हैं।
कहा कि आज भारतीय आस्था का सौभाग्य है कि विन्ध्याचल पर्वत शिखर पर जहां योगमायाजी अवतरित हुई थी, ठीक उसी स्थल पर श्रीकृष्णयोगमाया शक्ति पीठ का दिव्य देवालय निर्मित किया जा रहा है। यह सदियों तक श्रीकृष्ण योगमाया के साथ व्रज-विन्ध्य धाम का सनातनी कथा संवाद करता रहेगा। इस अवसर पंडित हरिओम शरण, आचार्य महेश चंद्र, धीरेंद्र सिंह, अभिषेक कुमार, संतोष द्विवेदी, विमल मिश्र, रामविजय सिंह, विनीत पांडेय, विनोद प्रताप, मधुरिमा, शुभम कुमार, पारसमणि, सुशीला देवी, बालेंद्र भूषण सिंह, आशीष तिवारी, दृष्टि सिंह, श्वेता सिंह, निर्मला देवी, प्रज्ञा सिंह, प्रियंका सहित दर्जनों स्त्री-पुरुष श्रद्धालु श्रोतागण उपस्थित थे। अंत में सबने मिलकर समवेत स्वर में भागवत भगवान की आरती में भाग लिया और कथा प्रसाद ग्रहण किया।

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