सगुण रुप में प्रकट होकर भक्तों की प्रीति स्वीकार करते हैं भगवान : स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के सिगाड़ी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर शुक्रवार को परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने गोवर्धन धारण लीला के माध्यम से भक्ति और शरणागति का सार समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान सगुण रुप में प्रकट होकर भक्तों की प्रेमभावना को स्वीकार करते हैं और उनका कलेवा प्रसाद तक ग्रहण करते हैं।
कथाविस्तार के क्रम में उन्होंने बताया कि व्रजवासियों द्वारा छप्पन भोग अर्पित किए जाने पर गोविंद गिरिधारी गोवर्धन के मध्य शिखर से प्रकट होकर साक्षात भोग ग्रहण करने लगे। सात वर्ष की आयु में सात दिनों तक गोवर्धन धारण करना अहंकार त्याग और धर्म संरक्षण का दिव्य संदेश है। उन्होंने कहा कि कार्तिक शुक्ल तृतीया से अक्षय नवमी तक गोवर्धन गिरिराज का पूजन और परिक्रमा करने से भक्तों के मनोरथ पूर्ण होते हैं। गोवर्धन श्रीराधा-कृष्ण के प्रेम का जीवंत स्वरूप हैं, जिनकी परिक्रमा की भक्ति-धारा निरंतर प्रवाहित रहती है।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री श्रीराम सोनकर, शकुंतला देवी, अखिलेश जैन, गीता देवी, राघवेंद्र राय, जूही सिंह, अभिमन्यु दूबे, मधुबाला, प्रकाश यादव, कालिंदी देवी सहित सैकड़ों श्रद्धालुभक्त उपस्थित थे। सबने समवेत स्वर में छप्पन भोग की आरती कर प्रसाद ग्रहण किया।




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