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हनुमान जी जैसा भक्त कोई नहीं : धर्मराज शास्त्री

हनुमान जी जैसा भक्त कोई नहीं : धर्मराज शास्त्री

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना कस्बे से लगे बरहदपुर स्थित किशुनदास बाबा की कुटी पर आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन दौरान कथा व्यास पंडित धर्मराज शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमानजी के जीवन और चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसार में अनेक भक्त हुए हैं, लेकिन निष्ठा, त्याग और पराक्रम की दृष्टि से हनुमानजी की तुलना किसी से नहीं की जा सकती।

धर्मराज शास्त्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम के लिए जितने भी कठिन कार्य थे, उन्हें हनुमान जी ने पूर्ण समर्पण के साथ संपन्न किया। सौ योजन समुद्र को पार करना साधारण बात नहीं थी, किंतु हनुमान जी ने अपनी भक्ति और शक्ति से इसे संभव कर दिखाया। मार्ग में सतोगुण का प्रतीक सुरसा, रजोगुण का प्रतीक सिंहिका और तमोगुण का प्रतीक लंकिनी पर विजय प्राप्त कर उन्होंने यह संदेश दिया कि सच्चा भक्त गुणों के बंधन से मुक्त होकर ईश्वर की सेवा करता है।

कथावाचक ने बताया कि लंका पहुंचकर हनुमान जी ने अहंकार के प्रतीक रावण को चुनौती दी और सनातन धर्म की मर्यादा का संरक्षण किया। उन्होंने माता सीता को भगवान श्रीराम का संदेश देकर उनके विरह की पीड़ा को शांत किया। धर्मराज शास्त्री ने कहा कि हनुमान जी का जीवन यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में साहस, विवेक और करुणा का संतुलन आवश्यक है।

इस अवसर पर रामज्ञानी दास, संपूर्णानंद महाराज, सुरेशानंद, अविनाश जायसवाल, कन्हैया सिंह, लक्ष्मी गुप्ता, कमलेश सिंह, तेजनाथ मौर्य, धर्मेंद्र सिंह, मनोज कुमार, संतोष सिंह, श्याम चौबे आदि सैकड़ों श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।




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