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शिक्षा के साथ संस्कार व परहित की भावना जरूरी : धर्मराज शास्त्री

शिक्षा के साथ संस्कार व परहित की भावना जरूरी : धर्मराज शास्त्री

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना कस्बे से लगे किशुनदास बाबा की कुटी बरहदपुर में चल रही नौ दिवसीय कृष्ण लीला एवं श्रीराम कथा के दौरान बुधवार को कथा प्रवक्ता पंडित धर्मराज शास्त्री महाराज ने कहा कि आज के समय में शिक्षा के साथ संस्कार और परहित की भावना अत्यंत आवश्यक है। केवल शिक्षा से व्यक्ति पूर्ण नहीं बनता, बल्कि संयम और संस्कार से ही समाज का कल्याण संभव है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की शिक्षा अयोध्या में हुई, लेकिन उनके संस्कारों का परिचय तब मिला जब राजा दशरथ ने लोककल्याण के लिए प्राणों से प्रिय पुत्र राम और लक्ष्मण को संत विश्वामित्र के साथ भेज दिया। अहिल्या उद्धार प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने समाज को संदेश दिया कि जिसे लोग तिरस्कृत करते हैं, उसका भी उद्धार राम करते हैं। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन परहित और समाज कल्याण को समर्पित रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्त्री-पुरुष श्रद्धालुभक्त उपस्थित थे

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