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सनातन एक समुदाय नहीं बल्कि अनुकरणीय जीवन विधि है : सत्यनारायन यादव

सनातन एक समुदाय नहीं बल्कि अनुकरणीय जीवन विधि है : सत्यनारायन यादव

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र अंतर्गत सुल्तानीपुर बाजार की फिज़ा रविवार को सनातन चेतना से सराबोर रही, जब यहां आयोजित हिंदू सम्मेलन ने सामाजिक समरसता, शिक्षा और संस्कारों का संदेश दूर तक फैलाया। दीप प्रज्वलन के साथ मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री एवं विधान परिषद सदस्य यशवंत सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही मजबूत राष्ट्र की नींव रखता है और संस्कारयुक्त शिक्षा से ही भावी पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त होता है।

सम्मेलन की अध्यक्षता पूर्व ग्राम प्रधान सत्यनारायण यादव ने की। अपने ओजस्वी उद्बोधन में उन्होंने कहा कि सनातन धर्म किसी एक पहचान की परिधि में बंधा नहीं, बल्कि वह जीवन को जीने की एक सुसंस्कृत और अनुकरणीय पद्धति है। यह अनुशासन सिखाता है, नैतिकता का दीप जलाता है और पारिवारिक मूल्यों को जीवन का आधार बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं समन्वय, सह-अस्तित्व और सौहार्द का वही संदेश देती हैं, जिसे सनातन युगों से संसार को सिखाता आया है। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। माता-पिता, गुरु और बुजुर्गों का सम्मान ही वह संस्कार है, जिससे समाज की इमारत मजबूत होती है। शिक्षा जब नैतिक मूल्यों से जुड़ती है, तभी वह चरित्र निर्माण का माध्यम बनती है।

सम्मेलन का संयोजन व संचालन समाजसेवी अजय गुप्ता ने कुशलता से किया, जबकि अवधेश सिंह ने अंत में कृतज्ञता ज्ञापित की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उदयशंकर चौरसिया, यशवंत उपाध्याय, जमालुद्दीन अहमद, कथावाचक जगदीश सिंह, रमाकांत यादव, वेदप्रकाश राय तथा लोकगायक हरिकेश यादव ‘पगला’ उपस्थित रहे। सैकड़ों लोगों की सहभागिता ने आयोजन को स्मरणीय बना दिया।



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