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माहपुर के मोहम्मद खां जैविक विधि से उगा रहे बेहतरीन फसलें

माहपुर के मोहम्मद खां जैविक विधि से उगा रहे बेहतरीन फसलें

•दपेहड़ी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के चंद्रपाल चौहान से जुड़कर ला रहे सकारात्मक बदलाव

•कंपोष्ट, जीवामृत एवं संजीवनी खाद का स्वयं करते हैं निर्माण

•फसल अवशेषों को इकट्ठा कर, सूक्ष्म जीवों की मदद से बनाते हैं ताकतवर खाद

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के माहपुर निवासी मोहम्मद खां व्यवसाय छोड़ जैविक खेती की अलख जगा रहे हैं। पिछले चार वर्षों से इस तरह की खेती करते हुए पर्याप्त अनुभव इकट्ठा कर विभिन्न बेहतरीन फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, वह भी बिना किसी रासायनिक खादों व केमिकल के प्रयोग किए हुए। अब इन्हें देखकर क्षेत्र में अन्य किसान भी जैविक व प्राकृतिक खेती की तरफ अग्रसर हो रहे हैं।

मोहम्मद खां ने बताया कि 2022 में उनकी मुलाकात दपेहड़ी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड करहां मील के डायरेक्टर चंद्रपाल चौहान से हुई। जो विभिन्न किसानों को अपने फर्म में जोड़कर जैविक व प्राकृतिक खेती हेतु जागरुक करते हैं। उनके सानिध्य में एनबीएआईएम व आईसीएआर कुशमौर तथा पिलखी विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से बार-बार मिलना हुआ। इसके बाद हम लोंगो ने स्वयं सूक्ष्मजीवों, फसल अवशेषों, कूड़ा-करकट, पराली, गोबर, गुड़, बेसन, जंगल की मिट्टी आदि के प्रयोग से जैविक कंपोष्ट, जीवामृत तथा संजीवनी खाद द्वारा खेती करने लगे। देखा गया कि कुछ ही वर्षो में रासायनिक खाद छूट गई और पहले की तुलना में फसल का उत्पादन व गुणवत्ता दोनो में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। अब हम लोग बहुत कम लागत में रसायन व प्रदूषण रहित खेती करते हैं तथा कोई भी फसल अवशेष जलाते नहीं बल्कि उसका उपयोग मिट्टी की ताकत व सूक्ष्म जीवों को बढ़ाने में करते हैं।

इस अवसर पर चंद्रपाल चौहान ने बताया कि इस प्रकार की खेती से मिट्टी की ताकत निरंतर क्षीण होने की बजाय बढ़ती है। रसायन व प्रदूषण घटता है तथा इससे उत्पन्न अनाज रसायन रहित होने से हमारे स्वास्थ्य को नुकसान नहीं करता। एक समूह बनाकर हम एक दूसरे का सहयोग करते हैं, उनके द्वारा बनाई गई जैविक खादों व उत्पादों के लिए बाजार भी उपलब्ध कराते हैं। आज हमारी फर्म में मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना व रानीपुर ब्लाक के 15 गांवो के रहने वाले कुल 483 किसान इस दिशा में एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं और अपने तथा अपने परिवार का विकास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जैविक खेती करने से हम फसल अवशेष नहीं जलाते बल्कि उसका उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने में करते हैं। इससे प्रदूषण भी नहीं होता तथा किसान मित्र सूक्ष्मजीव भी नहीं मरते। ये सूक्ष्मजीव हमारे लिए खाद व दवा बनाने में मदद करते हैं जिससे रासायनिक खादों पर से हमारी निर्भरता समाप्त हो जाती है। हम। सभी लोग प्राकृतिक रुप से बेहतर व ज्यादा फसलों का उत्पादन कर रहे हैं वह भी शून्य लागत पर। कहा कि कुछ ही वर्षो में जैविक खेती करने से मिट्टी की गुणवत्ता इतनी बढ़ जाएगी कि पुनः किसी तरह के खाद की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।



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