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विविध संदेशपरक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी एपीबीपी की शाम

विविध संदेशपरक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी एपीबीपी की शाम

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के सुरहुरपुर की धरती पर रविवार की शाम कुछ यूँ उतरी, जैसे भावनाओं ने रंग ओढ़ लिया हो और सुरों ने पंख लगा लिए हों। एपीबीपी स्मृति बालिका इंटर कॉलेज का वार्षिकोत्सव ‘अभ्युदय दि डॉन ऑफ इरा' मानो नवरस की जीवंत सरिता बनकर बह उठा। जहाँ हर प्रस्तुति में जीवन के रंग झलकते रहे और हर ताल पर संवेदनाएँ थिरकती रहीं। छात्राओं ने जब मंच संभाला, तो कभी शृंगार की मधुर मुस्कान बिखरी, कभी वीर रस की गर्जना गूँजी, तो कहीं करुणा की हल्की सी छाया दिलों को छू गई। बंगाल, उड़ीसा, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व बिहार के लोकनृत्यों की मोहक प्रस्तुतियों ने भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरो दिया। मोबाइल के दुष्प्रभाव पर आधारित नृत्य-नाटिका ने आधुनिकता के आईने में आत्ममंथन का संदेश दिया। मानो कोई धीमी पुकार कह रही हो कि किताबों और समाचार पत्रों में ही ज्ञान का सच्चा उजाला है। वहीं रौद्र व विभत्स रस की प्रस्तुतियों ने धमनियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ा दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि लखनऊ सीबीआई कोर्ट जिला एवं सत्र न्यायाधीश वायुनंदन मिश्र, सभाध्यक्ष वित्तीय सलाहकार कोलकाता पंकज तिवारी, विशिष्ट अतिथि ब्राह्मण विकास परिषद के ब्लाक अध्यक्ष प्रणव चतुर्वेदी व वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र राय द्वारा मां सरस्वती व भारत माता के चित्र पर पूजन-अर्चन, पुष्पार्चन-माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। समारोह की गरिमा उस समय और बढ़ गई, जब मुख्य अतिथि, सभाध्यक्ष व विशिष्ट अतिथि के करकमलों से कक्षा 6 से 12 तक के 34 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मां भगवता एवं प्रभावती तिवारी योग्यता छात्रवृत्ति के रुप में प्रमाणपत्र व चेक प्रदान किए गए। यह क्षण मानो परिश्रम की तपस्या को सम्मान का आकाश मिलना था।

वहीं, पर्यावरण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले मंडल भर से आए 11 ‘पर्यावरण मित्रों’ को पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। जैसे धरती की हरियाली को प्रणाम करने का एक सजीव संकल्प लिया गया हो।

मुख्य अतिथि न्यायाधीश वायुनंदन मिश्र ने अपने उद्बोधन में विद्यालयों को राष्ट्र निर्माण की कार्यशाला बताया। उन्होंने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से अभिभूत होकर कहा कि केवल त्रिकोण, समकोण व षटकोण का ज्ञान पर्याप्त नहीं, जब तक शिक्षक विद्यार्थियों में व्यापक दृष्टिकोण विकसित न करें। उन्होंने भारतीय शिक्षा प्रणाली और संस्कारों को अपनाने पर बल दिया।

विशिष्ट अतिथि प्रणव चतुर्वेदी एवं अधिवक्ता महेंद्र राय ने समय की पाबंदी, अनुशासन, कौशल विकास और भारतीय शिक्षा पद्धति की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जबकि सभाध्यक्ष पंकज तिवारी ने संदेशपरक प्रस्तुतियों से सीख लेकर जीवन में उतारने की अपील की।

कार्यक्रम में सरस्वती वंदना, स्वागत नृत्य, शास्त्रीय नृत्य, मार्शल आर्ट पर आधारित आत्मरक्षा प्रस्तुति, देशभक्ति समूह नृत्य एवं पिरामिड प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और तालियों की गूंज देर तक वातावरण में बनी रही। यह ‘अभ्युदय’ केवल एक वार्षिकोत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, शिक्षा और संवेदनाओं का ऐसा संगम था, जहाँ हर हृदय में एक नई रोशनी जल उठी।

अंत में प्रधानाचार्य रेनुलता पाठक ने अतिथियों का स्वागत किया, प्रबंधक अशीत कुमार पाठक एडवोकेट ने धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कार्यक्रम का सफल मंच संचालन कुंवर अजीत प्रताप सिंह ने किया। इस अवसर पर सुधाकर राय, धर्मदेव यादव, सुरजीत राय, मोहित भारद्वाज, चंदन उपाध्याय, अभिषेक यादव, विशाल गुप्ता, साक्षी पाठक, रामसमुझ यादव, दुर्गाशंकर पांडेय, सच्चितानंद चतुर्वेदी सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएं, अभिभावक एवं क्षेत्रीय गणमान्य जन उपस्थित रहे।




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