सवर्ण समाज ने उठाई हक और समान अवसर की आवाज
•राष्ट्रीय सवर्ण आयोग के गठन समेत आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग
•राष्ट्रपति के नाम डीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन
आजमगढ़। सामाजिक सरोकारों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने अब संगठित पहल की दिशा में कदम बढ़ाया है। समाज के आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से कमजोर वर्गों को नीतियों में समुचित स्थान दिलाने तथा उनकी समस्याओं को प्रभावी मंच देने के लिए स्वतंत्र और अधिकार-संपन्न राष्ट्रीय सवर्ण आयोग गठित करने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपने की तैयारी है।
प्रतिनिधियों ने आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करते हुए आर्थिक आधार को अधिक प्रभावी बनाने की मांग की है। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों की समीक्षा तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के कथित दुरुपयोग पर रोक के लिए कानूनी और प्रक्रियात्मक सुधार की आवश्यकता जताई गई है।
प्रतिनिधियों के अनुसार छह सितंबर को चक्रपानपुर स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में हुई बैठक में विभिन्न गांवों से आए लोगों ने समाज की मौजूदा चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर मंथन किया। बैठक में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि आर्थिक रूप से कमजोर और शैक्षणिक अवसरों से वंचित लोगों की वास्तविक परिस्थितियों को नीति-निर्माण में पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए। इसी सोच को आवाज देते हुए अब आयोग गठन समेत अन्य मांगों को शासन तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।





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