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क्या ठंडे बस्ते में पड़ गया पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का मऊ इंटरचेंज-?

क्या ठंडे बस्ते में पड़ गया पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का मऊ इंटरचेंज-?

•277.5 किमी की लोकेशन पर रैंप प्लाजा बनाने की मिली थी स्वीकृति

•सर्वे, मैपिंग व मार्किंग के बाद भी चार-पांच साल से अधर में परियोजना

•इसके निर्माण पर जिले के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर उठ रहे सवाल

करहां (मऊ) : पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण से मऊ जिले के लोगों को भी राजधानी लखनऊ, दिल्ली और बिहार की ओर आवागमन सुगम होने की उम्मीद जगी थी। इसके लिए जनपद स्थित रानीपुर-गोकुलपुरा के बीच 277.5 किमी की लोकेशन पर रैंप प्लाजा बनाने की कवायद शुरु हुई। तत्कालीन यूपीडा मंत्री सतीश महाना की ओर से स्वीकृति मिलने के बाद सर्वे, मैपिंग और मार्किंग तक की प्रक्रिया पूरी हुई और मौके पर झंडियां भी लगाई गईं। इसके बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया होनी थी, लेकिन परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। चार-पांच वर्ष बाद भी मऊ को एक्सप्रेसवे पर चढ़ने-उतरने की सुविधा नहीं मिल सकी है। खास बात यह है कि इस मुद्दे पर अबतक जिले का कोई जनप्रतिनिधि आगे नहीं आया। उनकी उदासीनता समझ से परे है इसलिए उनके रुख पर जनपदवासियों का सवाल उठाना लाजिमी है।

मऊ में इंटरचेंज अथवा रैंप प्लाजा नहीं होने से जिले के लोगों को लखनऊ व दिल्ली की ओर जाने के लिए आजमगढ़ के सठियांव तथा पटना-बिहार की ओर जाने के लिए गाजीपुर के हैदरा-मरदह इंटरचेंज का रुख करना पड़ता है। एक्सप्रेसवे के आसपास के करीब 28 किलोमीटर क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह अतिरिक्त दूरी और परेशानी का कारण है। खासकर दोनों इंटरचेंज तक पहुंचने में रेलवे लाइनों को पार करने की समस्या भी सामने आती है। सर्विस रोड पर समुचित पुल नहीं होने के कारण लोगों को घूमकर दूसरे रास्ते से जाना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिले की सीमा में एक्सप्रेसवे का लंबा हिस्सा गुजर रहा है तो यहां इंटरचेंज की सुविधा से वंचित रखना समझ से परे है। प्रस्तावित 277.5 किमी रैंप प्लाजा के साथ 267 किमी पर जनसुविधा केंद्र की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। लोगों का आरोप है कि परियोजना की प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी स्थानीय स्तर पर इसे आगे बढ़ाने के लिए अपेक्षित पहल नहीं हुई। ऐसे में अब सरकार और संबंधित विभाग से मऊ के प्रस्तावित इंटरचेंज को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग तेज हो रही है।

सठियांव या मरदह जाना पड़ता है

•पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से लखनऊ व पटना जाने के लिए मऊ के लोगों को आजमगढ़ के सठियांव और गाजीपुर के मरदह जाना पड़ता है। जिले में अब तक एक अदद इंटरचेंज क्यों नहीं बना, यह समझ से परे है।

-रामाश्रय सिंह, प्रबंधक, शमशाबाद

मऊ के साथ नाइंसाफी क्यों-?

•रानीपुर व गोकुलपुरा के बीच प्रस्तावित रैंप प्लाजा को ठंडे बस्ते में डालना मऊ जिले के साथ नाइंसाफी है। जनप्रतिनिधियों और सरकार को इस मामले का संज्ञान लेकर परियोजना पूरी करानी चाहिए।

-विक्की वर्मा, समाजसेवी, करहां

स्थानीय लोगों को मिले सीधा लाभ

•मऊ की सीमा से होकर एक्सप्रेसवे गुजरने के बावजूद जिले के लोगों को इसका सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इंटरचेंज बनने से क्षेत्र के आवागमन के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

-आकिब शमीम खां, व्यवसायी, माहपुर

शीघ्र शुरु हो निर्माण

•प्रस्तावित रैंप प्लाजा के लिए जब सर्वे और मार्किंग तक की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी तो अब इसे लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। सरकार को जनहित में निर्माण कार्य शीघ्र शुरु कराना चाहिए।

-पंकज कुमार त्रिपाठी, अधिवक्ता, नगपुर


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यूपीडा के किसी अधिकारी का वर्जन-

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