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जप यज्ञ से मन की शुद्धि और आत्मिक शांति की होती है प्राप्ति : पं. सुदामा पांडेय

जप यज्ञ से मन की शुद्धि और आत्मिक शांति की होती है प्राप्ति : पं. सुदामा पांडेय

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील स्थित कोठिया धाम में ब्रह्मलीन संत ब्रह्मर्षि रामकृष्णजी महाराज की स्मृति में आयोजित पंचदिवसीय ब्रह्म गायत्री जप यज्ञ के तीसरे दिन रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूजन-अर्चन के बीच निर्धारित जप की संख्या पूर्ण हुई। इस अवसर पर यज्ञाचार्य पंडित सुदामा पांडेय ने जप यज्ञ की महत्ता बताते हुए इसे समस्त यज्ञों में श्रेष्ठ बताया। उन्होंने कहा कि जप के माध्यम से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी गीता में 'यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि' कहकर जप यज्ञ की श्रेष्ठता स्वीकार की है। जप से मन शुद्ध होता है और चित्त में शांति आती है।

कथावाचक पंडित गिरिजेश पांडेय ने कहा कि ब्रह्मर्षि रामकृष्ण महतज वैदिक शिक्षा, जप और तपश्चर्या के आदर्श संत थे। परोपकार उनकी प्रकृति में था। उन्होंने अपने जीवन में कभी धन को हाथ नहीं लगाया। उनका मानना था कि जो उनका था, वह सबका था। इस दौरान कोठिया, भदीड़, खालिसा, वलीदपुर, भदवा समेत आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर पुण्य लाभ लिया। यज्ञ संपादन में पंडित लव चतुर्वेदी, नरेंद्र सिंह, चंडी तिवारी, अभिषेक सिंह, प्रवीण राय, शिवम आचार्य, देवमणि त्रिपाठी, पुनीत कुमार, शशि सिंह, प्रभुनाथ यादव सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे।

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