जन्म-जन्मांतर के पुण्य से पुण्यात्मा ही कराते हैं यज्ञ : स्वामी ज्ञानानंद
◆जिले के फत्तेपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति में पहुंचे भारत के प्रख्यात शांकर सन्यासी
◆हवन में भाग लेकर सैकडों श्रद्धालुभक्तों को किया संबोधित
करहाँ (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के फत्तेपुर में चल रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति में देश के प्रख्यात शांकर सन्यासी परिव्राजकाचार्य परमहंस स्वामी ज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज का आगमन हुआ। कथा के प्रमुख आयोजक एकलव्य सिंह ने ग्राम, कुटुम्ब वासियों समेत स्वामीजी का जनपद की सीमा पर पहुंच स्वागत कर जुलूस की शक्ल में लेकर यज्ञ स्थल पर पहुंचे। स्वामीजी सीधे सबसे पहले यज्ञ मंडप में गए और श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति में भाग लिया। आरती उपरांत उपस्थित सैकड़ो भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यज्ञ का आयोजन जन्म जन्मांतर के पुण्य फल से कोई पुण्यात्मा ही करा पाता है। आप सभी इसके साक्षी बनने वाले पुण्यात्मा ही हैं।
आचार्य महेश व अभिषेक ने स्वामीजी की उपस्थिति में मुख्य यजमान रमेश सिंह व सुधा देवी से पुर्णाहुति कार्य सम्पन्न करवाया। सबने मिलकर पुर्णाहुति प्रसाद एवं सायंकाल भंडारे का महाप्रसाद ग्रहण किया और पुण्य के भागी बने। उपस्थित सैकड़ो श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करते हुए स्वामी जी ने कहा कि देव एवं पितृ कार्यो में कभी प्रमाद नहीं करना चाहिए। "देव, पितृ कार्य न प्रमतव्यम।" क्योंकि उनके ही आशीर्वाद और कई जन्मों के पुण्य से श्रीमदभागवत कथा करने का सौभाग्य मिलता है। कहा कि देव कार्य से भी बढ़कर पितृ कार्य श्रेष्ठ माना जाता है। देवी-देवता की पूजा न कर सकें तो कोई बात नहीं लेकिन अपने पूर्वजों को हमेशा याद करना चाहिए। यदि पित्रगण खुश हों तो परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति भी मिलती है। इसलिए जीवन काल में कम से कम एक बार गया तीर्थ धाम में श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म करके श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ का आयोजन जरूर करना चाहिए।
इस अवसर पर पंडित विनीत पांडेय, आशीष तिवारी, अशीत कुमार पाठक एडवोकेट, प्रियव्रत शुक्ल, संजय पाठक, राधेमोहन सिंह, आशीष चौधरी, सत्यव्रत व आयुष ब्रह्मचारी, अविनाश सिंह आदि सैकड़ो श्रद्धालुभक्त उपस्थित रहे।







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