बच्चों की जिज्ञासा करें शांत, पढ़ायें नैतिकता का पाठ : सादिया ज़ोहरा
करहाँ, वलीदपुर (मऊ) : स्कूली बच्चे मिट्टी के कच्चे घड़े के समान होते हैं। वे अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिये हमेशा प्रश्न पूछते रहते हैं। इनके प्रश्नों का उचित उत्तर देने से ही इनके अंदर ज्ञान का विकास होगा। प्रायः बच्चे खुले विचारों वाले होते हैं। वे प्रथा, परंपरा, नैतिकता, आध्यात्मिकता जैसी बातों से दूर भागते हैं। लेकिन माता-पिता एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं को चाहिये कि वे बच्चों को समय-समय पर इनके महत्व की चर्चा अवश्य करें। साथ ही नैतिकता व अनुशासन की घुट्टी जरूर पिलाते रहें।
उक्त बातें एस.एस. पब्लिक स्कूल वलीदपुर मऊ की अंग्रेजी अध्यापिका सादिया जोहरा ने विद्यार्थियों के समक्ष व्यक्त किये। वे बुधवार को प्रार्थना के समय बच्चों को दैनिक जागरण में प्रकाशित संस्कारशाला की कहानी पढ़कर सुना रही थीं। उन्होंने आगे कहा कि बच्चे प्रायः नैतिकता, अनुशासन, चरित्र निर्माण, ध्यान, चिंतन व अध्यात्म से दूर भागते हैं।
व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास एवं जीवन की सफलता में इनके अहम योगदान को बड़े तो समझते हैं, परंतु बच्चे नहीं। इसलिये सभी अभिभावकों, शिक्षक समाज, पड़ोस व नातेदारों को बच्चों के समक्ष उदाहरण के साथ इन चीजों का महत्व समझाना चाहिये। बताना चाहिये कि इनके बगैर आपका व्यक्तित्व व असल जीवन अधूरा ही रहेगा।
◆सादिया जोहरा, अध्यापिका अंग्रेजी, एस.एस. पब्लिक स्कूल, वलीदपुर, मऊ

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