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आजादी के 77 सालों बाद भी दरौरा में नहीं है प्राथमिक विद्यालय

आजादी के 77 सालों बाद भी दरौरा में नहीं है प्राथमिक विद्यालय

◆25 सालों से अधूरा बना भवन व्यवस्था को चिढ़ा रहा मुंह

◆पढ़ाई व मतदान के लिए जाना पड़ता है दूसरे गांव

करहां (मऊ) : शिक्षा क्षेत्र मुहम्मदाबाद गोहना स्थित दरौरा एक ऐसा दुर्भाग्यशाली गांव है जहां आजादी के 77 सालों बाद भी एक अदद प्राथमिक विद्यालय नहीं है। 25 वर्षो से अधिक समय से अधूरा पड़ा विद्यालय का निर्माण व्यवस्था व विकास कार्य को मुंह चिढ़ा रहा है। आज भी इस गांव के बच्चे एवं मतदाता पड़ोसी गांव के स्कूल में पढ़ने एवं लोकसभा, विधान सभा का मतदान करने जाते हैं।

ज्ञातव्य हो कि विकास के इस दौर में भी शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल की समस्या से कई गांव महरूम हैं। इसमें से एक गांव करहां बाजार के पास स्थित दरौरा गांव भी एक है। जहां आज भी न तो शुद्ध पेयजल की कोई सुविधा है, न अस्पताल है और न ही सरकारी प्राथमिक विद्यालय। जबकि अधर में लटके 25 वर्ष से अधिक समय से जर्जर हो चुके प्राथमिक विद्यालय के ढांचे के ठीक सामने अब एक विशाल निजी पब्लिक स्कूल संचालित होता है। करहां-शमशाबाद रोड के ठीक किनारे सरपतों और झाड़ियों से घिरा हुआ यह आधा-अधूरा भवन व्यवस्था के ऊपर एक काला धब्बा बना हुआ है। बरामदे में छत तो लगी लेकिन मुख्य भवन की छत कभी नहीं लग पाई थी कि यह भवन विवाद की भेंट चढ़ गया। यह विद्यालय आज भी अपनी पूर्णता की राह देख रहा है। जबकि जंगला-खिड़की और बचे मैटेरियल अज्ञात चोर उठा ले गए। हालांकि अब जमीनी विवाद हल हो चुका है और संबंधित लेखपाल जमीन की पैमाइश करके विद्यालय व रास्ते के लिये जमीन चिन्हित कर चुके हैं। अब विद्यालय के निर्माण में कोई अवरोध भी नहीं है।

दरौरा गांव के बच्चे आज भी पढ़ने के लिए वर्तमान में पडोसी गांवों शमशाबाद, नगपुर और माहपुर के प्राथमिक विद्यालयों में जाते हैं। इसके अलावा 1200 से अधिक वोटरों का गांव विद्यालय भवन के अभाव में लोकसभा एवं विधानसभा का वोट डालने शमशाबाद चलकर जाता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में दो आंगनबाड़ी केंद्र और हाल ही में पंचायत भवन का निर्माण हो गया परंतु विद्यालय की सुधि किसी ने नहीं लिया।

लगभग 25 वर्ष पहले तत्कालीन ग्रामप्रधान अली अहमद के प्रस्ताव पर दो बार पास हुआ यह विद्यालय भवन विवाद की भेंट चढ़ गया। दपेहड़ी निवासी तत्कालीन प्रधानाध्यापक लौटू राम के नेतृत्व में यह बनना शुरू हुआ था लेकिन काम रुका तो रुका ही रह गया। ग्रामीणों की मांग है कि कम से कम उनके गांव मे भी एक अदद प्राथमिक विद्यालय का निर्माण हो।

ग्राम प्रधान दरौरा मोहम्मद अशफाक का कहना है कि पूर्व में तहसील दिवस पर अपने गांव में प्राथमिक विद्यालय हेतु डीएम महोदय को ज्ञापन दिया था। आशा थी कि इस पर सम्बंधित अधिकारी संज्ञान लेंगे, लेकिन कोई सार्थक पहल नहीं हुई।

इस विषय मे खण्ड शिक्षा अधिकारी श्वेता मौर्या का कहना है कि- "यह विषय उच्चाधिकारियों के कार्यक्षेत्र से संबंध रखता है। वैसे मैं इस समय अवकाश पर हूं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से संपर्क करें।"

इस संदर्भ में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष उपाध्याय ने बताया कि- "इस विषय को मैं संज्ञान में लेता हूं। वहां की बीईओ से बात करके देखता हूं कि यह रुका कार्य ग्राम प्रधान निधि या फिर परियोजना किससे हो पाता है।


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