पूर्णिमा को पूर्णाहुति विशेष फलदायी : स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती
करहाँ (मऊ) : पितरों की विशेष कृपा एवं जन्म जन्मांतर के पुण्य फल के उदित होने से हमें सत्संग तथा कथा श्रवण का सौभाग्य प्राप्त होता है। इसलिए हमें कभी भी अपने जीवन काल में देव एवं पितृ कार्यो में प्रमाद नहीं करना चाहिए। "देव, पितृ कार्य न प्रमतव्यम।" अगहन मास एक तो भगवान कृष्ण का अतिप्रिय मास है वह भी पूर्णिमा को पूर्णाहुति होना अपने आप में विशेष फलदायी है। आप सभी अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि आपको इस परम पावन मार्गशीर्ष माह में श्रीमद्भागवत कथा सुनने एवं पूर्णिमा में हवन आदि पूर्णाहुति कार्य सम्पन्न करने का सुअवसर प्राप्त हुआ है।
उक्त उद्गार मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के तिवारीपुर नासिरपुर व क्षेत्रान्तर्गत सुहवल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति में पहुँचे देश के सुप्रसिद्ध संत व श्रीकृष्ण योगमाया शक्तिपीठ के अध्यक्ष परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज ने व्यक्त किये। वे उक्त दोनों कथाओं की पूर्णाहुति में पहुँचे हुये थे। कथा के मुख्य यजमान विजयबहादुर तिवारी, रामअवतार सिंह, डॉक्टर अशोक तिवारी व उदयवीर सिंह ने ने ग्राम, कुटुम्ब वासियों समेत स्वामीजी का स्वागत कर जुलूस की शक्ल में लेकर यज्ञ स्थल पर पहुंचे। स्वामीजी सीधे सबसे पहले यज्ञ मंडप में गए और सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति में भाग लिया। पंडित महेश चंद्र मिश्र, आचार्य धनंजय पांडेय, आचार्य शुभम तिवारी, आचार्य गौरव मिश्र, आचार्य विमल मिश्र, पंडित प्रियव्रत शुक्ल व कुलदीप ने स्वामीजी की उपस्थिति में पुर्णाहुति कार्य सम्पन्न करवाया।
उपस्थित सैकड़ो श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करते हुए स्वामीजी ने कहा कि देव कार्य से भी बढ़कर पितृ कार्य श्रेष्ठ माना जाता है। देवी-देवता की पूजा न कर सकें तो कोई बात नहीं लेकिन अपने पूर्वजों को हमेशा याद करना चाहिए। यदि पितृ गण खुश हों तो परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। इसलिए जीवन काल में कम से कम एक बार गया तीर्थ धाम में श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म करके श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ का आयोजन करना चाहिए। जब भगवान और पितरों की विशेष कृपा होती है तब हमें कथाप्रसाद का सौभाग्य मिलता है।
इस अवसर पर आचार्य आशीष तिवारी, विनीत पांडेय, राजनारायण तिवारी, दीना सिंह, तेजप्रताप तिवारी, रामविलास दूबे, रणधीर यादव, दिनेश मिश्रा, राहुल सिंह, तेजबहादुर सिंह, पिटू कुमार, अखिलानंद द्विवेदी, किशुन चौहान, मुन्ना त्रिपाठी, प्रभुनाथ राम, मनीष चौबे, आशीष चौधरी, राजनारायण तिवारी, अजय वर्मा, बलवन्त सिंह समेत सैकड़ों महिला-पुरुष भक्तगण व स्वामीजी के अनुयायी मौजूद रहे।






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