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अम्बेडकर जयंती पर मंत्री ए.के. शर्मा ने दी विकास की सौगात

अम्बेडकर जयंती पर मंत्री ए.के. शर्मा ने दी विकास की सौगात

◆2000 से अधिक गरीबों को मिलेगा अपना घर

◆15.06 करोड़ की 31 परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण

(मऊ) : भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने नगर पंचायत अमिला, मऊ में भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गरीबों और वंचितों के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं।

एस.एस.बी. इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मंत्री श्री शर्मा ने सबसे पहले अम्बेडकर चौक पर बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके उपरांत उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के 10 लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चाबियाँ सौंपीं और 15.06 करोड़ रुपये की लागत से संचालित 31 विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया।

उन्होंने आश्वस्त किया कि अमिला नगर पंचायत में विकास की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। हर गरीब को घर मिलेगा, सड़कें बनेंगी, नालियां सुधरेंगी, पार्क व प्रकाश की बेहतर व्यवस्था होगी। उन्होंने बताया कि बीते 3 वर्षों में 515 लाभार्थियों को पीएम आवास योजना के अंतर्गत घर मिले हैं, 507 नए आवास स्वीकृत हुए हैं और 500 नए आवासों के लिए चयन प्रक्रिया चल रही है। यानी 2000 से अधिक गरीबों को अपने सपनों का घर मिलने जा रहा है।

अपने प्रेरणादायक संबोधन में श्री शर्मा ने कहा, “डॉ. अम्बेडकर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए आदर्श हैं। उनके विचारों, संघर्षों और योगदान ने भारत को एक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में केंद्र व राज्य की डबल इंजन सरकार बाबा साहेब के सपनों को धरातल पर उतारने के लिए दृढ़ संकल्पित है। गरीबों को राशन, मकान, शौचालय, घरेलू गैस, मुफ्त इलाज, बिजली कनेक्शन जैसी सुविधाएं मिल रही हैं।

श्री शर्मा ने गर्वपूर्वक बताया कि मोदी जी ने लंदन स्थित उस घर को स्मारक में बदला जहां बाबा साहेब ने पढ़ाई की थी, उन्हें भारत रत्न दिलाया और 14 अप्रैल को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया।

उन्होंने मंच से कहा कि कुछ लोगों द्वारा ‘गली-गली में नाम है, ए.के. शर्मा कांशीराम है’ जैसे नारों से सम्मानित किया जा रहा है, जो उनके लिए गौरव की बात है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि “माननीय कांशीराम जी जैसा व्यक्तित्व अद्वितीय था, मेरी उनसे कोई तुलना नहीं। हाँ, हम दोनों की समानता बस इतनी है कि हमने सरकारी नौकरी छोड़कर जनसेवा को चुना।”



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