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माँ की आँचल का सहारा : हर्षिता सिंह

माँ की आँचल का सहारा : हर्षिता सिंह

करहां (मऊ) : मैंने जबसे समझना शुरू किया तबसे लेकर अबतक सिर्फ ममतामयी मां की आंचल का ही सहारा देखा है, क्योंकि नन्ही जान बनकर जब मां की गोंद में थी तभी चिकित्सक पिता का आकस्मिक रुप से शाया हट गया। बड़ी होने पर मां, दादा-दादी, चाचा-चाची के साथ संसार को समझने का मौका मिला। एक मां का अपने बच्चे से स्नेह व अपेक्षा क्या होती है यह स्वयं मुझे पिछले महीनों एक खूबसूरत बेटे की मां बनने के बाद एहसास हुआ है। मातृ दिवस की आत्मिक बधाई मां। काश मैं आपका बेटा होती..

हर्षिता सिंह, करहां, मऊ

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