मेरी माँ अमूल्य रत्न : डॉ. त्रयंबक त्रिपाठी
करहां (मऊ) : मेरी मां हेमलता त्रिपाठी मेरे लिए एक अमूल्य रत्न हैं। मेरे जीवन का आधार, प्रेम और ममता का सागर हैं। वह हमारी पहली शिक्षक, सबसे अच्छी दोस्त और हमेशा साथ रहने वाली एक अनमोल साथी है। मेरी मां के बिना मेरा जीवन अधूरा है। दरअसल मां का प्रेम अनमोल और निस्वार्थ होता है। वह हमेशा हमारे सुख-दुख में साथ रहती है, हमें सही राह दिखाती है और हर मुश्किल से लड़ने की शक्ति देती है। मां की ममता किसी भी परिभाषा से परे होती है। वह हमें जीवन के हर पड़ाव पर सहारा देती है और हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। मां के प्यार का कोई विकल्प नहीं होता, वह जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।
न कोई उम्मीद, न कोई गिला, तेरा प्यार सच्चा, सबसे है अलबेला।
हर रूप में तू देवी लगती है, मां, तेरा प्यार ही मेरी जिंदगी है।।
◆डॉ.त्र्यम्बक दत्त त्रिपाठी, नगपुर-मऊ
B.Sc, Dph, BAMS LKO UP
नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ
(जनरल फिजिशियन)

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