पिता का असमय साया उठने से एक मां ही सहारा : अवनीत
करहां (मऊ) : 10 मार्च 2022 की वह मनहूस सुबह जब असमय व आकस्मिक रुप से क्रूर काल ने मेरे शिक्षक पिता अजय सिंह को हमसे छीन लिया। अनेक असाध्य रोगों से पीड़ित मेरी मां मीरा सिंह तबसे लेकर अबतक मुझ दिव्यांग बेटे को मां और बाप दोनों का प्यार-दुलार देकर पाल रही हैं। गरीबी, बेरोजगारी, बीमारियों से घिरी व परिवार समाज के असहयोग की शिकार मेरी मां सब सहन करते हुये भी किस कठोर हृदय से हमें पढ़ा-लिखाकर पालन-पोषण कर रही है उसका बखान शब्दों में नहीं किया जा सकता। सचमुच इस दुनियां में मां से बलवान कोई नहीं हो सकता। मैं जल्दी से बड़ा होकर असहाय, विधवा व बीमार मां का सहारा बनना चाहता हूं।
◆अवनीत सिंह, सिकंदरपुर, मऊ

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