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दूसरों की भलाई से बड़ा कोई धर्म नहीं : जगदीशाचार्य महाराज

दूसरों की भलाई से बड़ा कोई धर्म नहीं : जगदीशाचार्य महाराज

करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के शमशाबाद स्थित स्वयंभू शिव मंदिर में सावन मास पर्यंत रामकथा का आयोजन चल रहा है। सातवें दिन शुक्रवार की कथा में प्रयागराज से पधारे कथावाचक जगदीशाचार्य महाराज ने कहा कि दूसरों की भलाई करने से बड़ा संसार में कोई धर्म नहीं है, जबकि दूसरों को कष्ट देने से बड़ा अधर्म कोई नहीं।

उन्होंने इस संबंध में गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरित मानस की चौपाई परहित सरिस धरम नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई की व्याख्या करते हुए हनुमत चरित्र पर प्रकाश डाला। कहा कि जो संसार का करे वो भगवान श्रीराम है और जो भगवान श्रीराम का काम करे उसका नाम हनुमान है। मानस प्रवक्ता ने हनुमान जी को तीनों लोक का सबसे बड़ा परोपकारी बताया। कहा कि परोपकार के समान कोई धर्म नहीं है। परोपकार ऐसा कार्य है, जिससे शत्रु भी मित्र बन जाता है। यदि शत्रु पर विपत्ति के समय उपकार किया जाए तो वह भी सच्चा मित्र बन सकता है। इस संबंध में उन्होंने राम-सुग्रीव मित्रता और बालि युद्ध का प्रकरण सुनाया।

इस अवसर पर आचार्य करुणाशंकर, हेमा सिंह, हरिनारायण सिंह, कालिंदी देवी, इंद्रदेव सिंह,  शशिकला, दयाशंकर सिंह, गीता देवी, गुड्डू कुमार, डब्बू सिंह, रामनारायन गुप्ता, कृपाशंकर, सुभाष गुप्ता, खुशबू सिंह, सत्यम तोमर सहित सैकड़ों श्रद्धालु श्रोता उपस्थित रहे।

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