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जिस लंका में मांगने पर नहीं मिली आग, वह पानी मांगने पर हुआ मजबूर : आचार्य करुणाशंकर

जिस लंका में मांगने पर नहीं मिली आग, वह पानी मांगने पर हुआ मजबूर : आचार्य करुणाशंकर

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के प्राचीन स्वयंभू शिवमन्दिर शमशाबाद में चल रही श्रावण मास पर्यंत श्रीराम कथा के आठवें दिन कथावाचक आचार्य करुणाशंकर ने लंका दहन का प्रसंग सुना कर जोश से भर दिया। उन्होंने कहा कि जिस सीता मां को एक दिन पहले लंका में राक्षसियों एवं विभिन्न लोंगो से मांगने पर आग नहीं मिल रही थी, उस लंका को अगले दिन हनुमान जी ने आग ही आग में बदल दिया।

कथा का विस्तार देते हुए मानस प्रवक्ता ने कहा कि जब अशोक वाटिका में रावण सीता को डरा धमकाकर जाता तो माता सीता के मन मे प्राण त्यागने का विचार आता। वह सुरक्षा में लगी त्रिजटा से आत्मदाह के लिए अग्नि मांगती लेकिन उन्हें नहीं दिया जाता। वह मजबूर होकर आकाश, चांद, तारे व चमकते हुए पत्तों से भी आर्द्र स्वर में गुहार लगाती। यह सब माता सीता को छिपकर देख रहे हनुमान ने दुखी मन से सुना। उन्होंने माता सीता से साक्षात्कार होने के बाद कहा कि जो अग्नि लंका में आपको नहीं मिल रही उसका हर घर कल पानी मांगने पर मजबूर हो जाएगी। उन्होंने ऐसा कहके अगले दिन लंका दहन करके राख में बदल दिया।

इस दौरान आचार्य जगदीश, जयप्रकाश सिंह, बालेंद्र सिंह, इंद्रदेव सिंह, हरिश्चन्द्र, संतोष तोमर, कालिंदी देवी, हेमा सिंह, दयाशंकर, रितेश कुमार, बालरूप, आरती शर्मा, रामनरायन, अजीत प्रताप, डब्बू सिंह आदि सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। अंत में सबने आरती कर प्रसाद ग्रहण किया।



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