अभिमान असफलता की कुंजी : जगदीशाचार्य जी महाराज
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक क्षेत्र के शमसाबाद स्थित स्वयंभू शिव मंदिर में चल रही रामकथा के नौंवे दिन रविवार कथा प्रवक्ता जगदीशाचार्य जी महाराज ने रामकथा में अहंकार व अभिमान के नुकसान पर प्रकाश डाला। कहा कि अज्ञान व अभिमान ही इस सारे जगत के दुःखों का कारण है। या तो हम जानते नहीं हैं या तो हमें जानने का ही घमंड होता है।
जगदीशाचार्य महाराज ने सूर्पनखा की कथा के दौरान बताया कि उसने तो भगवान के मोहपाश में बंधकर स्वयं उन्ही से शादी करने का जबर्दस्ती दबाव बनाकर उनका साक्षात अपमान कर दिया, इसकी कीमत उसको अपनी नाक-कान कटवानी पड़ी। इससे क्रोधित होकर रावण ने अभिमान में जबरदस्ती अपने स्वयं के मामा को जान से मारने की धमकी देते हुए स्वर्ण मृग बनने को विवश कर दिया। जबकि मारीच ने उसे बताया कि वह विष्णु के अवतार हैं, उनका प्रतिरोध करना ठीक नहीं है, लेकिन रावण नहीं समझा। इसके परिणामस्वरूप उसके पूरे कुल का सर्वनाश हो गया। कहा कि इसलिए कभी भी अभिमान व अहंकार में ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जो विनाश का कारण बने। अंततः अभिमान ही रावण की असफलता व अंत का कारण बना।
इस अवसर पर जयप्रकाश सिंह, दयाशंकर सिंह, हरिश्चन्द्र पासवान, इंद्रदेव सिंह, रूदल बांसफोर, आशीष सिंह, अखिलेश सिंह, संतोष शर्मा, आरती शर्मा, मीरा सिंह, शिवदास शर्मा, बाबूलाल सिंह, रामनारायण गुप्ता, रामदरश पासवान, हेमा सिंह, खूशबू सिंह, कालिंदी देवी, शशिकला सिंह, श्यामविजय, दुखहरन यादव, रामसिंगार शर्मा, रामलगन सरोज, शेषनाथ सिंह, शैलेश कुमार, रामविलास पासवान, अंगद खरवार, हरिनाथ यादव, आधार सरोज, महावीर गोंड़, दुखहरन यादव, प्रिंस कुमार, हीरामणि, मीरा, पिंकू, कमला देवी, मरछू पासवान, मिठाईलाल शर्मा, हरिवंश सरोज, रौशनी कुमारी, आरती शर्मा सहित अनेक श्रद्धालुगण मौजूद रहे।





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