अहंकार व अधर्म का अंत है विनाश : जगदीशाचार्य महाराज
करहां (मऊ) : क्षेत्र के शमशाबाद स्थित स्वयंभू शिव मंदिर में श्रावण मास पर्यंत चल रही रामकथा के नौवें दिन रावण-मारीच संवाद की कथा सुनाई गई। प्रयागराज से पधारे संत जगदीशाचार्य महाराज ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अहंकार व अधर्म करने लगता है तब उसका अंत निकट आ जाता है। यही रावण के साथ भी हुआ।
कथा विस्तार के क्रम में कथाप्रवक्ता ने बताया कि जब सूर्पनखा प्रभु श्रीराम के रुप से मोहित होकर विवाह का अनावश्यक दबाव बनाने लगी, तब लक्ष्मण ने उसकी नाक काट ली। कटी नाक के साथ रावण के दरबार मे पहुंच सूर्पणखा ने अपनी कहानी बताई तो रावण क्रोधित हो गया।
बताया कि रावण ने अपने मामा मारीच से स्वर्ण मृग बनने को कहा। मारीच ने बताया कि प्रभु श्रीराम अवतारी पुरुष हैं, विष्णु के अवतार से दुश्मनी करना ठीक नहीं है। अहंकार व अधर्म के मद में चूर रावण ने मामा की मर्यादा को लांघकर उन्ही का वध करने की धमकी देते हुए उन्हें सख्त निर्देश दिया। उसका परिणाम यह हुआ कि अंततः पूरे परिवार सहित रावण का अंत हो गया।
इस अवसर पर आचार्य करुणाशंकर, हीरामणि देवी, इंद्रदेव सिंह, कमला देवी, जयप्रकाश सिंह, हेमा देवी, बाबूलाल, कालिंदी देवी, रामनरायन, पिंकू सिंह, दयाशंकर सिंह, रुदल बांसफोर, शशिकला, शिवदास, खुशबू, शेषनाथ सिंह, आरती शर्मा, दुखहरन यादव, सत्यम तोमर, मरछू राम, शैलेश कुमार, आशीष सिंह, हरिबंश वैरागी, संतोष शर्मा, मिठाईलाल शर्मा, डब्बू सिंह सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।






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