साहब-! पागल, खूंखार, आवारा व रैबीज वाले कुत्तों की कैसे करें पहचान-?
करहां (मऊ) : सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त के अपने फैसले में बड़ा बदलाव करते हुए कहा है कि अब सिर्फ खूंखार कुत्ते या रेबीज से प्रभावित कुत्ते ही पकड़े जाएंगे और शेल्टर होम में भेजे जाएंगे। जाहिर है शीर्ष अदालत ने अपना यह फैसला डाग लवर्स या पशु प्रेमियों के हित में दिया है। अदालत के इस फैसले से कुत्तों के काटने से मृत व पीड़ित, सड़कों पर पैदल चलने वाले या स्कूटर-बाइक चलाने वाले कुत्तों के शिकार बने लोगों में निराशा है। उनका मानना है कि अदालत ने कुत्तों के अधिकारों को तरजीह दी लेकिन इंसानों के अधिकारों के बारे में नहीं सोचा।
अनेक पीड़ित लोंगो ने जिज्ञासा जाहिर की है कि आखिर कोई कैसे जानेगा कि सड़क पर चुपचाप घात लगाए बैठा कोई कुत्ता पागल या खूंखार नहीं है, उसे काट नहीं लेगा, दौड़ा नहीं लेगा या उसे रेबीज नहीं है। आम लोगों ने अपनी-अपनी पीड़ा के संदर्भ में अपनी व्यथा सुनाई है। उनका कहना है कि सड़कों पर पागल, आवारा घूम रहे, लोगों को दौड़ाते, डराते, बच्चों को काटते इन कुत्तों को आखिर क्यों नहीं शेल्टरहोम में भेज देना चाहिए। नगर निगम और नगर पालिका के अधिकारियों को बताना चाहिए कि आखिर कब तक शेल्टर होम बना दिए जाएंगे और खतरनाक कुत्तों को वहां कब तक भेजा जाएगा। अदालत ने कुत्तों के लिए पिंजरे (केज) बनाने का आदेश भी नगर निगमों को दिया है। उन्हें बताना चाहिए कि पिंजरे कब तक बन जाएंगे।
•19 अगस्त की शाम मेरी छह वर्षीय बच्ची सुहानी और पड़ोसी गांव चकभीखा के पांच वर्षीय कन्हैया को आवारा कुत्ते ने गंभीर रुप से काटकर घायल कर दिया। आखिर हम कैसे पहचाने कि वह रैबीज वाला है कि नहीं।
◆रणधीर कन्नौजिया, अरैला, मऊ•पिछले मई माह में अनाज सुखाते समय पीछे से मेरे पैर में एक कुत्ता काटकर भाग गया। एंटी रैबीज व एंटी सीरम के कुल पांच डोज लगवाने और मरहम पट्टी के बाद भी आजतक मैं नहीं जान पाई कि कुत्ता पागल या खूंखार था कि नहीं।
◆मीरा देवी, सिकंदरपुर, मऊ•पिछले हफ्ते मेरे परिवार के 11 वर्षीय बालक राजकुमार और तीन माह पहले मेरे नाती सत्यम को कुत्ते ने काटकर घायल कर दिया। उसके पहचान में चिकित्सक भी असमर्थ दिखे। उन्हें एन्टीरैबिज का इंजेक्शन लगवाया गया है।
◆शिवबचन राजभर, कमालपुर-पहाड़पुर, मऊ•प्रायः राह चलते कुत्ते साइकिल व बाइक सवार को दौड़ाकर काट लेते हैं। कभी-कभी राहगीर डरकर और लड़कर भी बुरी तरह घायल हो जाते हैं और मर भी जाते हैं। पशुओं को भी कुत्तों द्वारा काटकर घायल करने की घटनाएं आएदिन हो रही हैं। आवारा कुत्तों को चिन्हित किया जाना जनहित में आवश्यक है।
◆अजय सिंह, शमशाबाद, मऊ■इस विषय में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुहम्मदाबाद गोहना के वरिष्ठ चिकित्सक डाक्टर संतोष कुमार यादव ने बताया कि पागल, खूंखार या रैबीज से ग्रस्त कुत्ते की लार हमेशा टपकती रहती है। उसका सर झुका रहता है और वह पानी से डरता है। ऐसा कुत्ता अचानक बहुत चिड़चिड़ा या डरपोक हो जाता है और बिना कारण काटने व भौंकने लगता है। उसके अंदर अत्यधिक आक्रामकता आ जाती है और वह मामूली उकसावे पर हमला करने व इंसानों-जानवरों का पीछा करने लगता है। उसकी चाल-ढाल असामान्य हो जाती है। उसके अंदर लड़खड़ाहट व असंतुलन बढ़ जाता है और उसकी आवाज बदल जाती है। वह रात में ज्यादा सक्रिय हो जाता है और इधर-उधर भटकना, बिना वजह भौंकना या रोना उसकी दिनचर्या में शामिल हो जाता है। उनकी शरीर गंदी, आंखें लाल या पीली, बाल उलझे हुए हो जाते हैं। इन लक्षणों वाले कुत्तों से क्षेत्रवासी सजग रहें।
डॉक्टर संतोष कुमार यादव






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