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रामराज बैठे त्रैलोका, हर्षित भये गये सब शोका


रामराज बैठे त्रैलोका, हर्षित भये गये सब शोका


करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक अंतर्गत शमशाबाद में चल रही रुद्रचंडी महायज्ञ के आठवें दिन वेदी पूजन, चंडी पाठ, हवन और रुद्राभिषेक अर्चन किया गया। यज्ञाचार्य जनार्दनाचार्य महाराज ने सभी वैदिक ब्राह्मणों के साथ सभी सपत्निक यजमानों के द्वारा पार्थिव शिवलिंगों का अनुष्ठान अनुरुप अभिषेक अर्चन सम्पन्न करवाया। शाम की कथा में लंका विजय और राम की राजगद्दी की कथा सुनाई गई। कहा गया कि जब अयोध्या में रामराज स्थापित हुआ तो तीनों लोंको के लोंगो के शोक का हरण हो गया और सभी हर्षित हो उठे।

कथावाचक जगदीशाचार्य महाराज ने कहा कि जब रावण ने माता सीता का हरण कर लिया, तब श्रीराम ने वानरराज सुग्रीव, हनुमान, जामवंत आदि की सहायता से विशाल वानर सेना संग लंका पर चढ़ाई की। समुद्र पर रामसेतु बनाकर सेना सहित लंका पहुंचे। युद्ध में मेघनाद, कुम्भकर्ण, अतिकाय आदि राक्षस मारे गए। अंततः भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया। यह धर्म की अधर्म पर विजय थी। माता सीता की अग्निपरीक्षा के बाद उन्हें सम्मानपूर्वक स्वीकार किया गया।

लंका विजय के पश्चात श्रीराम, सीता और लक्ष्मण पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे, जहाँ भरत ने उनका स्वागत किया। चौदह वर्षों का वनवास पूर्ण हो चुका था। अयोध्या में उत्सव का माहौल था। सभी नगरवासी हर्षित थे। श्रीराम का राज्याभिषेक भव्य रूप से हुआ, वे अयोध्या के महाराज बने।

इस दौरान इंद्रदेव सिंह, करुणाशंकर महाराज, रामलाल शर्मा, आचार्य विद्यासागर तिवारी, उपाचार्य पंडित माधव, हरिओम मिश्रा, आशुतोष तिवारी, जितेंद्र पांडेय, आशीष, प्रभाकर शास्त्री, बाबूलाल, मीरा देवी, रामनरायन गुप्ता, इंदू गुप्ता, विजय नारायण सिंह, बीना सिंह, रामा सिंह, सावित्री देवी, राजेश सिंह, प्रतिमा सिंह, दयाशंकर तोमर, हेमा सिंह, विनय कुमार, कंचन देवी, अखिलेश सिंह, खुशबू सिंह, मिथिलेश सिंह, सुनीता आदि सैकड़ों भक्त मौजूद रहे।

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