कुत्तों का बढ़ रहा प्रकोप, जिम्मेदारों को नहीं कोई शोक
•हर दिन जनपद में किसी न किसी क्षेत्र में कुत्ते बन रहे हमलावर
•रेबीज प्रभावित की पहचान करना मुश्किल
करहां (मऊ) : सड़क पर रहने वाले कुत्तों से जनपद का हर व्यक्ति परेशान है। कोई न कोई हर दिन इनका शिकार हो रहा है। यही नहीं इनकी खूंखार व रेबीज प्रभावित जैसी पहचान करना संभव नहीं है। जनपद के हर स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रेबीज वैक्सीन की व्यवस्था प्रशासन की तरफ से की गई है। जिला अस्पताल में हर दिन वायल लगाया जा रहा है। यानी हर साल सरकार लाखों रुपये रेबीज इंजेक्शन पर खर्च कर रही है।
ऐसे में शेल्टर होम बन जाने से इन्हें इनमें रखा जाएगा, जिससे कम से कम ये लोगों पर हमला तो नहीं कर पाएंगे। अभी बीते दिनों रानीपुर थानांतर्गत अरैला गांव में खेल रही छह वर्षीय बच्ची सुहानी को सड़क के कुत्ते ने दौड़ा-दौड़ाकर काटा और बुरी तरह जख्मी कर दिया। आसपास के लोगों के शोर मचाने के बाद कुत्ते ने बच्ची को छोड़ा। उसे 16 टांके लगाने के बाद एंटी रेबीज व पुनः एंटी सीरम का इंजेक्शन लगाया गया। नगर पालिका व नगर पंचायत की तरफ से अभी कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
◆हमारे गांव में कुत्तों और बंदरों का बहुत आतंक है। आए दिन लोगों को ये निशाना बनाते रहते हैं। इनका कोई स्थायी समाधान जरूरी है। अदालत को इस पर कड़ी पहल करने की जरूरत है।
-शमशाद अहमद, करहां मऊ।◆हमारे घर और दुकान के सामने प्रायः राहगीरों को सड़क के कुत्ते दौड़ा देते है। कभी-कभी कई राहगीर काटने और गिरने से घायल हो जाते हैं। कोई बड़ी दुर्घटना भी घट सकती है।
-रामनरायन गुप्ता, शमशाबाद मऊ।◆खूंखार, रेबीजयुक्त कुत्तों को आम लोगों द्वारा पहचानना मुश्किल है। इसके लिए इनके पंजीकरण, टीकाकरण, और शेल्टर हाउस की व्यवस्था होनी चाहिए।
-वीरेंद्र चौहान, माहपुर मऊ।◆गांवों, कस्बों, रास्तों और विद्यालयों के आसपास सड़क पर रहने वाले कुत्तों का घूमना खतरनाक बनता जा रहा है। रेबीजयुक्त कुत्तों की पहचान का संकट है।
-चंदन उपाध्याय, सुरहुरपुर मऊ।






Post a Comment