Top News

81 वर्षो पुरानी सौसरवां-कमालुद्दीनपुर की रामलीला में 43 वर्षो तक श्रीधर पांडेय बने ब्रह्मा व 35 वर्षो तक काले हनुमान बने महेंद्र सिंह

81 वर्षो पुरानी सौसरवां-कमालुद्दीनपुर की रामलीला में 43 वर्षो तक श्रीधर पांडेय बने ब्रह्मा व 35 वर्षो तक काले हनुमान बने महेंद्र सिंह

•पूंछ बुझाने के बाद हनुमान तैरकर पार करते हैं विशाल जलाशय

•ब्राह्मण बनते हैं राम-लक्ष्मण-सीता, राजपूत हनुमान

•28 सितंबर रविवार से शुरु होगा मंचन, 05 अक्टूबर रविवार होगी राजगद्दी

करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के रामलीला समिति सौसरवां-कमालुद्दीनपुर की सुप्रसिद्ध रामलीला का इतिहास 81 वर्षो पुराना है। यहां आजादी के पहले 1945 से रामलीला का भव्य मंचन हो रहा है। रामलीला समिति के पुराने व सम्मानित सदस्य रहे 72 वर्षीय श्रीधर पांडेय ने जहां 43 वर्ष ब्रह्मा का किरदार निभाया, वहीं समिति के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे महेंद्र सिंह ने 35 वर्षों तक काले हनुमान का कालजयी अभिनय किया। पिछले वर्ष उनके निधन से काले हनुमान के रूप में उनकी गर्जना अब नहीं सुनाई देगी। यहां के रामलीला की एक बड़ी विशेषता यह है कि लंका दहन के बाद पूंछ बुझाने के उपरांत हनुमानजी को वहां स्थित विशाल सरोवर को तैरकर पार करके अशोक वाटिका स्थित माता सीता के पास पहुंचना होता है।

यहां के रामलीला की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि यहां राम, लक्ष्मण और सीता का अभिनय नाबालिग ब्राह्मण बालक ही करते हैं, जबकि परंपरा से हनुमान का किरदार प्रायः राजपूत सदस्यों ने ही निभाया है। इस बार यहां की लीला का मंचन 28 अक्टूबर दिन रविवार को नारद मोह से शुरु होगा और समापन 05 अक्टूबर रविवार को प्रभु श्रीराम की राजगद्दी के साथ होगा।

43 वर्षो तक ब्रह्मा बने श्रीधर पांडेय

उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परासी से सेवानिवृत्त शिक्षक रहे 72 वर्षीय श्रीधर पांडेय ने 1967 में रामलीला में अभिनय की शुरुआत की। उन्होंने 1980 से लेकर 2023 तक कुल 43 वर्ष ब्रह्मा का बखूबी किरदार निभाया। गांव के बहुत सारे लोग आज भी उन्हें ब्रह्माजी के नाम से जानते हैं और वैसा ही सम्मान करते हैं।

स्व. महेंद्र सिंह ने 35 वर्षो तक किया काले हनुमान का कालजयी अभिनय

बता दें कि लंबे समय से रामलीला समिति के नेतृत्वकर्ता व हनुमान का जीवंत अभिनय करने वाले सौसरवां निवासी महेंद्र सिंह का पिछले वर्ष निधन हो गया। उनकी काले हनुमान के रुप मे अदा किए गए कालजयी अभिनय को अभी भी लोग सम्मान सहित याद करते हैं।

नाबालिग ब्राह्मण बनते हैं राम-लक्ष्मण-सीता व प्रायः हनुमान बनते हैं राजपूत

यहां के रामलीला की प्रमुख विशेषता यह भी है कि राम, लक्ष्मण और सीता का अभिनय नाबालिग ब्राह्मण बालक ही करते हैं, जबकि परंपरा से हनुमान का किरदार प्रायः राजपूत सदस्यों ने ही निभाया है। स्व. महेंद्र सिंह की बीमारी व निधन के उपरांत फिलहाल राजेश पांडेय वर्तमान में काले हनुमान का अभिनय कर रहे हैं।

लंका दहन में पूंछ बुझाने के उपरांत हनुमान तैर कर पार करते हैं बड़ा जलाशय

यहां की रामलीला में हनुमान का मुंह काला बनाया जाता है जबकि सुग्रीव सहित अन्य बंदरों का मुंह लाल बनाया जाता है। यहां के काले हनुमान द्वारा लंका दहन के बाद पूछ बुझाने के उपरांत विशाल सरोवर को तैरकर पार किया जाता है तथा अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट किया जाता है। इस लीला को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होती है।

Post a Comment

Previous Post Next Post